चेन्नई , सितंबर 02 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नेपाल में 26 अगस्त को आयी अचानक बाढ़ के बाद मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति टीएस शिवगणनम समेत लापता हुए राज्य के तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए उठाये गये कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह मामला तमिलनाडु और पुडुचेरी के उन 57 लोगों से जुड़ा है, जो 23 अगस्त को कुंभकोणम से एक टूर ऑपरेटर के जरिये नेपाल गये थे और वहां अचानक आयी बाढ़ तथा भूस्खलन की चपेट में आ गये।
तीन में से एक बस में सवार 21 लोगों को सुरक्षित निकालकर केंद्र और राज्य सरकार चेन्नई वापस ले आयी है, जबकि अन्य दो बसों में सवार शेष 36 तीर्थयात्रियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
इसके अलावा, चेन्नई से 14 अगस्त को नेपाल की तीर्थयात्रा पर गया और 27 अगस्त को लौटने के कार्यक्रम वाला 49 तीर्थयात्रियों का एक अन्य दल भी संपर्क से बाहर है।
रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ आने के वक्त इस दल को अंतिम बार नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित आव्रजन केंद्र पर अपनी वापसी यात्रा के कागजी कामकाज पूरा करते हुए देखा गया था।
आपातकालीन बचाव उपायों की मांग करने और सुरक्षित निकाले गये, इलाज करा रहे तथा अब भी लापता लोगों का विवरण प्रदान करने का अनुरोध करते हुए डिंडीगुल के अधिवक्ता परवेज मुशर्रफ ने उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की।
उन्होंने अधिकारियों को परिजनों को यात्रियों की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करने और बचाव कार्यों में तेजी लाने का निर्देश देने की भी मांग की।
इसके बाद याचिका को चेन्नई स्थित मुख्य पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया।
जब यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुरुगन की प्रथम पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो महाधिवक्ता विजय नारायण ने न्यायालय को बताया कि तमिलनाडु से 305 लोग कैलास यात्रा पर गये थे, जिनमें से 220 को बचाकर उनके गृह नगर वापस भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि शेष 85 लापता लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।
महाधिवक्ता ने न्यायालय को सूचित किया कि समन्वय और सहायता की सुविधा के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवगणनम के परिवार सहित लापता लोगों के परिजनों को सरकारी खर्च पर काठमांडू ले जाया गया है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केंद्र और राज्य सरकार को व्यापक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। इसमें लापता लोगों की तलाश और उन्हें वापस लाने के लिए चलाये जा रहे बचाव एवं राहत अभियानों का विस्तृत ब्योरा देने को कहा गया है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गयी है।
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