चेन्नई , सितंबर 19 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर को मदुरै जिले में अपनी सरकार की प्रमुख योजना 'थैमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' (मामा की ओर से मुफ्त सोने की अंगूठी योजना) की शुरुआत करेंगे।
इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को एक ग्राम वजन की सोने की अंगूठी दी जायेगी।
राज्य सचिवालय में श्री विजय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री के. जी. अरुणराज और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
योजना के तहत गत 22 जून से सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाला प्रत्येक शिशु एक ग्राम की सोने की अंगूठी पाने का पात्र होगा। सरकार ने इस पहल को तमिल संस्कृति में मामा की पारंपरिक भूमिका को दर्शाने वाली कल्याणकारी योजना बताया है। यह मातृ एवं शिशु कल्याण से जुड़ी सरकार की व्यापक पहलों का भी हिस्सा है।
इस योजना की शुरुआत पहले 15 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की जयंती के अवसर पर की जानी थी, लेकिन श्री विजय की लंदन की आधिकारिक यात्रा के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। राज्य सरकार ने अब इसके लिए 28 सितंबर की नयी तारीख तय की है।
सरकार ने योजना के पहले चरण में 1,28,000 सोने की अंगूठियां खरीदी हैं। प्रत्येक अंगूठी का वजन एक ग्राम होगा और उस पर विशिष्ट क्रमांक अंकित होगा। वितरण व्यवस्था के तहत अंगूठियों को छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में भी उपलब्ध कराया जायेगा।
योजना का लाभ तमिलनाडु की स्थायी निवासी महिलाओं को मिलेगा। लाभार्थियों का गर्भावस्था एवं शिशु समूह निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली (पीआईसीएमई) में पंजीकृत होना और आरसीएच पहचान संख्या होना आवश्यक है। योजना के तहत 22 जून से औपचारिक शुरुआत की तारीख तक सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को भी शामिल किया जायेगा। इसके लिए 107 वितरण केंद्रों के माध्यम से व्यवस्था की गयी है। सरकार ने 28 सितंबर से पात्र बच्चों को प्रतिदिन 100 की संख्या में अंगूठियां वितरित करने की योजना बनायी है। योजना शुरू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को मां और बच्चे की अस्पताल से छुट्टी के समय सोने की अंगूठी दिए जाने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य वितरण प्रक्रिया को सुगम बनाना और पात्र लाभार्थियों को अलग से अस्पताल आने की आवश्यकता के बिना योजना का लाभ सुनिश्चित करना है।
सरकार ने इस पहल की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु में मौजूदा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल ढांचे का उल्लेख किया है। इसमें गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता, निशुल्क प्रसव सेवाएं, नवजात शिशु देखभाल, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, पोषण सहायता, प्रसव की तैयारी और पीआईसीएमई आधारित निगरानी जैसी सेवाएं शामिल हैं।
योजना को लेकर सामने आये सरकारी आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में हर वर्ष करीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है। इनमें लगभग 99.9 प्रतिशत प्रसव संस्थागत होते हैं, जबकि करीब 4.20 लाख प्रसव यानी लगभग 53 प्रतिशत सरकारी अस्पतालों में होते हैं। सरकारी अस्पतालों में होने वाले इन प्रसवों में करीब 90 प्रतिशत प्रसव व्यापक आपातकालीन प्रसूति एवं नवजात देखभाल (सीईएमओएनसी) केंद्रों में होने की जानकारी दी गयी है।
राज्य सरकार ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में लोगों का विश्वास मजबूत करना, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु कल्याण पर अपना ध्यान और मजबूत करना है।
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