नैनीताल , जून 15 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 से 2008 के बीच स्पेशल स्कीम के तहत प्राथमिक मदरसों में नियुक्त शिक्षकों को वर्ष 2016 से नियमित वेतन और अन्य देयकों का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सचिव अल्पसंख्यक कल्याण को पुनः अवमानना नोटिस जारी किया है।
न्यायालय ने सचिव से 11 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का अब तक अनुपालन नहीं किया गया है। न तो तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया और न ही शिक्षकों के प्रकरणों की जांच कर भुगतान संबंधी कार्रवाई पूरी की गई। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि इसी विषय से जुड़ी अन्य अवमानना याचिकाओं में भी सचिव अल्पसंख्यक कल्याण को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी संजय एवं अन्य शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर कर कहा है कि वर्ष 2023 में उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव को तीन सदस्यीय समिति गठित कर चार माह के भीतर उनके अभिलेखों की जांच करने तथा शिक्षकों के बकाया देयकों का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आज तक न तो आदेश का पालन किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें वर्ष 2006 से 2008 के बीच प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई विशेष योजना के तहत मदरसों में नियुक्त किया गया था। वर्ष 2016 के बाद उन्हें नियमित वेतन मिलना बंद हो गया और अन्य देयकों का भुगतान भी नहीं किया गया। इससे उनके समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सचिव अल्पसंख्यक कल्याण से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों के अनुपालन की स्थिति से न्यायालय को अवगत कराया जाए।
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