मथुरा , जुलाई 26 -- उत्तर प्रदेश के मथुरा में ब्रजमंडल के विश्व प्रसिद्ध पावन धाम गोवर्धन में मुड़िया पूनों (मुड़िया पूर्णिमा) मेले की धूम मची हुई है।
गिरिराज महाराज की सात कोस (21 किलोमीटर) लंबी परिक्रमा के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं और संतों का सैलाब उमड़ पड़ा है। 'राधे-राधे' और 'हरि बोल' के जयकारों से संपूर्ण गिरिराज तलहटी गुंजायमान हो रही है।
मुड़िया पूनों का इतिहास लगभग 469 वर्ष पुराना है, जो गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के महान संत श्रीमद् सनातन गोस्वामी जी के तिरोभाव (बैकुंठ गमन) से संबंधित है। संवत् 1615 में आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सनातन गोस्वामी जी गो लोक धाम पधार गए थे। उनके वैकुंठ गमन से शोकाकुल होकर वैष्णव संतों, शिष्यों और ब्रजवासियों ने अपने गुरुदेव के प्रति अगाध श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अपने सिर मुंडवा (मुड़िया करा) लिए थे। सिर मुंडवाने के कारण ही इस परंपरा को 'मुड़िया' कहा गया और यह दिन 'मुड़िया पूनों' के नाम से जाना जाने लगा।
आज भी गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के संत इस प्राचीन परंपरा का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वहन करते हैं। चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी जी की भजन कुटीर के समीप संत एकत्र होकर सामूहिक मुंडन कराते हैं। इसके पश्चात पावन मानसी गंगा में स्नान कर गोपीचंदन का तिलक धारण करते हैं।
मृदंग, ढोल और मंजीरों की थाप पर 'निताई-गौर हरि बोल' का संकीर्तन करते हुए संतों का जत्था सनातन गोस्वामी जी के चित्रपट की भव्य शोभायात्रा निकालता है और गिरिराज महाराज की परिक्रमा पूरी करता है।
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा मानसी गंगा, दानघाटी और आन्यौर क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात मार्ग में बदलाव (रूट डायवर्जन) के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
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