मथुरा , जून 09 -- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के समीप मंगलवार शाम बंदरों की उछल-कूद के कारण एक जर्जर मकान का छज्जा भरभराकर गिर पड़ा। इस घटना में उसके नीचे से गुजर रहे छह श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंदिर क्षेत्र की गली नंबर-5 में स्थित एक पुराने मकान के छज्जे पर बड़ी संख्या में बंदर उछल-कूद कर रहे थे। इसी दौरान बंदरों के भार और आपसी खींचतान के चलते जर्जर छज्जा अचानक ढह गया। घटना के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की ओर जा रहे थे, जिनमें से कई लोग मलबे की चपेट में आ गए।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय दुकानदारों और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया तथा पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

घायलों को तत्काल एंबुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। प्रशासन के अनुसार सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनकी पहचान और पते की जानकारी जुटाई जा रही है।

नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल से मलबा हटाकर मार्ग को पुनः सुचारु कराया। साथ ही एहतियात के तौर पर क्षतिग्रस्त भवन के आसपास के क्षेत्र को बैरिकेड कर दिया गया है, ताकि किसी अन्य दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके।

स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि मंदिर क्षेत्र में स्थित जर्जर भवनों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद ठाकुर बांके बिहारी मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से धैर्य एवं सतर्कता बरतने की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि वृंदावन में बंदरों का आतंक लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के कारण पूर्व में भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में मंदिर क्षेत्र में जर्जर भवनों की पहचान कर समय रहते उनकी मरम्मत अथवा ध्वस्तीकरण की मांग तेज हो गई है।

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