मथुरा , अप्रैल 11 -- मथुरा जिले के वृंदावन क्षेत्र में यमुना नदी में हुए नाव हादसे के दूसरे दिन शनिवार को रेस्क्यू टीमों ने नदी से एक और श्रद्धालु का शव बरामद किया गया। हालांकि, अभी भी 5 श्रद्धालु लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें यमुना की लहरों को खंगाल रही हैं।

जिला प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नाव और पीपा पुल ऑपरेटर को गिरफ्तार कर लिया है। आगरा मंडल के कमिश्नर नगेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि लापता लोगों की संख्या को लेकर शुरू में कुछ भ्रम की स्थिति थी। पहले 5 लोगों के लापता होने की जानकारी मिली थी, लेकिन जब देर रात श्रद्धालुओं के पूरे दल का मिलान किया गया, तो यह संख्या 6 निकली। शनिवार सुबह मिले शव के बाद अब लापता लोगों की संख्या 5 रह गई है। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जब तक आखिरी व्यक्ति का पता नहीं चल जाता, रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी रहेगा।

डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि प्राथमिक जांच में नाव और पीपा पुल ऑपरेटर की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण ही यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ। इसी को आधार बनाकर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और दो लोगों को हिरासत में ले लिया। डीआईजी ने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता लापता लोगों को सुरक्षित या उनके शवों को ढूंढना है, जिसके बाद घटना के हर पहलू की विस्तृत समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाएगी।"इस हादसे ने यमुना के घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। कमिश्नर ने संकेत दिया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद विश्राम घाट और केसी घाट जैसे संवेदनशील स्थलों पर नाव संचालन के नियम पूरी तरह बदल दिए जाएंगे। अब नावों की क्षमता और सुरक्षा उपकरणों की फिटनेस रिपोर्ट के बिना संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। सोशल मीडिया पर ओवरलोडिंग के वायरल वीडियो को भी प्रशासन ने संज्ञान में लिया है, जो जांच का मुख्य हिस्सा बनेंगे।

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