इंफाल , जुलाई 14 -- मणिपुर में एक प्रमुख नागरिक समाज संगठन , उरीपोक अपुनबा लुप (यूएएल) ने आज केंद्रीय गृह सचिव को एक ज्ञापन सौंप कर इंफाल पश्चिम जिले के लीमाखोंग में कथित आगजनी की घटना की निष्पक्ष जांच के साथ ही पीड़ितों के लिए मुआवजे, पुनर्वास और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

संगठन ने आरोप लगाया कि गत 11 जुलाई को लीमाखोंग में एक अत्यधिक सुरक्षित सैन्य छावनी क्षेत्र के भीतर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने मैतेई समुदाय के सदस्यों के छह घरों में आग लगा दी।

उन्होंने इस घटना को सुरक्षा की गंभीर चूक बताते हुए कहा कि सेना के जवानों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद यह हमला दिन-दहाड़े हुआ।

संगठन ने आरोप लगाया कि इस घटना ने सुरक्षा में बड़ी खामियों, एहतियाती उपायों की विफलता और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए समय पर हस्तक्षेप न होने की पोल खोल दी है।

ज्ञापन में आगे कहा गया है कि तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से लगातार मिल रही धमकियों और असुरक्षा के कारण इस इलाके के मैतेई निवासी अपने घरों को नहीं लौट पाए हैं, जिससे कई लोगों को राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आग बुझाने की कोशिश करने वाले ग्रामीणों को रोका गया और घायल किया गया, जबकि कथित तौर पर केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राज्य पुलिस कर्मियों को कई जगहों पर इलाके में प्रवेश करने से रोका।

संगठन के अनुसार, दमकल विभाग काफी देरी से घटनास्थल पर पहुंचा, तब तक घर जलकर राख हो चुके थे।

संगठन ने सुरक्षा में कथित चूक के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए घटना की गहन और निष्पक्ष जांच, सुरक्षा खामियों के लिए जिम्मेदारी तय करने, प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल मुआवजे और पुनर्वास, आगजनी में शामिल सभी लोगों की पहचान और उन पर मुकदमा चलाने तथा सामान्य स्थिति बहाल करने और विस्थापित निवासियों की उनके घरों में सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और मौलिक अधिकारों से जुड़ा है और केंद्रीय गृह सचिव से आग्रह किया गया है कि वे ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें।

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