इम्फाल , अप्रैल 09 -- मणिपुर में दो बच्चों की हत्या के विरोध में गुरुवार को कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।

विभिन्न स्थानों पर आज रात बड़ी संख्या में महिलाओं ने मशाल जुलूस निकाला और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निर्दोष बच्चों की हत्या और विरोध प्रदर्शन के दौरान सीआरपीएफ की गोलीबारी में तीन अन्य लोगों की मौत की निंदा करते हुए नारेबाजी की।

इसके अतिरिक्त अमूको , एमएसएफ, पोइरेई लीमारोल, कोहर और अमावोवा जैसे संगठनों द्वारा एक विशाल रैली निकाली गई। बाद में इन संगठनों के नेताओं ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री के. गोविंदस सिंह और विधायकों के साथ स्थिति पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने कहा कि बैठक में उठाए गए बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और चर्चा रचनात्मक रही। उन्होंने विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर भी गौर किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने हाल ही में कार्यभार संभाला है और ट्रोंगलाओबी की घटना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसने शांति बहाली के प्रयासों में बाधा डाली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थिति को पूरी गंभीरता से लिया गया है।

श्री खेमचंद ने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ निरंतर समन्वय में है और स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि घटना में शामिल दोषियों की पहचान की जाएगी और कानून के अनुसार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित मणिपुर की दिशा में सभी नागरिक समाज संगठनों और नागरिकों से निरंतर सहयोग माँगा।

बाद में मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक भी की, जिसमें गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजाम, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। उन्होंने सभी नागरिक और पुलिस अधिकारियों को स्थिति की बारीकी से निगरानी करने और कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए।

इससे पहले बुधवार को भी मुख्यमंत्री ने संयुक्त मुख्यालय (यूनिफाइड कमांड) की सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें सेना, असम राइफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के उच्चाधिकारियों ने भाग लिया था।

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