इम्फाल , सितंबर 13 -- मणिपुर भारतीय तेल निगम लिमिटेड (आईओसीएल) रिटेल आउटलेट डीलर्स एसोसिएशन ने नोनी में पेट्रोलियम टैंकरों के काफिले पर हाल ही में हुए हमले की आज कड़े शब्दों में निंदा की। संघ ने टैंकर चालकों के खिलाफ हिंसा और डराने-धमकाने की हरकत को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया।
संघ ने कहा कि ये चालक कठिन परिस्थितियों में दिन-रात पेट्रोलियम पदार्थों का परिवहन कर आवश्यक राष्ट्रीय सेवा दे रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संघ के अनुसार, 10 सितंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-37 (इम्फाल-जिरीबाम मार्ग) पर नोनी बाजार के पास यूनाइटेड नागा काउंसिल के बुलाये गये आर्थिक नाकाबंदी के समर्थकों ने जिरीबाम से इम्फाल जा रहे लगभग 150 टैंकरों और ट्रकों के काफिले को रोकने की कोशिश की। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा में जा रहे इस काफिले पर अवांगखुन और नोनी बाजार के पास दो चरणों में पथराव किया गया, जिसमें कम से कम पांच चालक गंभीर रूप से घायल हो गये और 40 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गये।
संघ ने घायल टैंकर चालकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और इम्फाल के राज मेडिसिटी में भर्ती दूसरे चालक/हेल्पर को मानवीय सहायता के रूप में 30,000 रुपये की वित्तीय मदद दी। दूसरी ओर, चालकों की यूनियनों ने सुरक्षा में हुई चूक की विभागीय जांच की मांग को लेकर मलोम तेल डिपो पर विरोध प्रदर्शन किया।
संघ ने बताया कि राज्य का रिटेल नेटवर्क मुख्य रूप से मणिपुर के प्रमुख भंडारण केंद्र मलोम डिपो पर निर्भर है। ऐसे में डिपो में घटते स्टॉक, बारिश, खराब सड़कों, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और राजमार्ग पर बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण राज्य भर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की नियमित आपूर्ति बनाये रखना कठिन हो गया है।
मणिपुर में कुल 227 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें 157 आईओसीएल, 51 बीपीसीएल, 15 एचपीसीएल और 4 नयारा के आउटलेट हैं। चूंकि आईओसीएल राज्य में मुख्य डिपो चलाने वाली अकेली कंपनी है और यह सुरक्षा बलों व आपातकालीन सेवाओं को भी ईंधन देती है, इसलिए मलोम डिपो में स्टॉक की निरंतर भरपाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
लोडिंग के पर्याप्त अवसर न मिलने से मलोम डिपो से जुड़े ट्रांसपोर्टर हफ्तों तक बेकार बैठे रहते हैं, जिससे उनके सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। राज्य के मौजूदा हालात और कम मांग के कारण कई आउटलेटों को चार केएल या आठ केएल का ही सीमित स्टॉक मिल पा रहा है।
संघ के अनुसार, मलोम के ट्रांसपोर्टरों को अन्य स्थानों की तुलना में कम भाड़ा और छोटी दूरी का काम मिलता है, जबकि गाड़ियों का परिचालन खर्च बराबर रहता है। इसलिए विशेष परिस्थितियों को छोड़कर इन्हें मोनरबन, लमडिंग या गुवाहाटी जैसे बाहरी मार्गों पर नहीं भेजा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि एनएच-37 के रास्ते रोजाना मणिपुर के लिए करीब 150 टैंकर रवाना होते हैं। संघ ने अधिकारियों से इस मार्ग पर टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और कुल 227 में से 157 आउटलेट आईओसीएल के होने के कारण इस रूट पर कंपनी के टैंकरों की हिस्सेदारी बढ़ाने का अनुरोध किया।
संघ ने कहा कि पेट्रोल पंप डीलर ऑनलाइन एसएपी प्रणाली से काम करते हैं और उनका ट्रांसपोर्टरों के विवादों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में राजमार्ग पर होने वाले विवादों या रुकावटों के लिए डीलरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
संघ ने चालकों की सुरक्षा, मलोम डिपो में पर्याप्त स्टॉक, एनएच-37 पर सुरक्षित आवाजाही, पेट्रोल पंपों पर ईंधन की निर्बाध आपूर्ति, लोडिंग के नियमित अवसर और ट्रांसपोर्टरों की वित्तीय समस्याओं के समाधान के लिए शासन व प्रशासन से तुरंत कदम उठाने की अपील की।
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