इम्फाल , जून 12 -- मणिपुर की नेटिव पीपल्स कमेटी (एनपीसीएम) ने छह नागा नागरिकों को बंधक बनाकर बेरहमी से प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन नागरिकों के शव कई दिनों की अनिश्चितता के बाद बरामद किये गये हैं।
एनपीसीएम ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए पीड़ितों की पहचान कांगपोकपी जिले के कोनसाखुल गांव के पादरी केनपीबोउ, फेनरोंगवी थियमई, रेव. डॉ. मनु थियमई, पादरी दिलीप थियमई, कालीवांगबोउ अबोनमई और सी.एच. फेनरिलुंग के रूप में की है।
कमेटी ने कहा कि इस अपराध को जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया उसने पूरे सभ्य समाज को झकझोर कर रख दिया है। एनपीसीएम के मुताबिक, मारे गए लोगों में पादरी और चर्च के प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा, भलाई और आस्था के लिए समर्पित कर दिया था। संगठन ने जोर देकर कहा कि यह केवल निर्दोष लोगों की जान लेना नहीं, बल्कि 'पूरी इंसानियत पर हमला' है।
एनपीसीएम ने पीड़ित परिवारों और पूरे नागा समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। कमेटी ने छह नागा बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी पर गंभीर चिंता जताई है। एनपीसीएम ने सवाल उठाया कि 14 कुकी बंधकों की सुरक्षित रिहाई के तुरंत बाद ही नागा नागरिकों के शवों का मिलना इस पूरे संकट से निपटने के तरीकों पर गहरे सवाल खड़े करता है। संगठन का कहना है कि जिस तरह से पूरी घटना सामने आई, उससे आम जनता के बीच यह संदेश गया है कि बंधक बनाए गए छह नागा नागरिकों की जान बचाने के मुकाबले, चौदह कुकी बंधकों की सुरक्षा और उनकी रिहाई को ज्यादा तवज्जो दी गई।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि यदि यह बात सच है, तो यह 'राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के इतिहास का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक मोड़' है। उन्होंने कहा कि जीवित बंधकों के बदले मारे गए नागरिकों के शव सौंपने को किसी भी कीमत पर न्याय नहीं माना जा सकता। कमेटी ने सरकार से इस पर जनता के सामने पूरी स्थिति साफ करने की मांग की है। संगठन ने छह नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या के इस मामले की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से तय समय सीमा के भीतर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस साजिश में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हर एक अपराधी की पहचान कर उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
एनपीसीएम ने कहा कि जिन लोगों या अधिकारियों को इन बंधकों के ठिकाने की जानकारी थी, लेकिन फिर भी उन्होंने समय रहते कदम नहीं उठाया या जानकारी छिपाने में मददगार रहे, उनकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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