नयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष की बढ़ती भूमिका के बीच, भारत के शीर्ष रक्षा और अंतरिक्ष नेतृत्व ने मजबूत, स्वायत्त और एकीकृत अंतरिक्ष क्षमताओं के तत्काल निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया है।

इंडियन स्पेस एसोसिएशन द्वारा गुरुवार को यहां आयोजित दो दिन के इंडियन डिफेंस स्पेस सिम्पोज़ियम का उद्देश्य भारत के रक्षा और अंतरिक्ष तंत्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। इसमें रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी, नीति-निर्माताओं, सार्वजनिक उपक्रमों, स्टार्टअप और उद्योग नेताओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

संगोष्ठी के पहले दिन का विषय 'वाणिज्यिक अंतरिक्ष संचालन: खतरों का प्रबंधन और सैन्य उपयोग'था। इसमें वैश्विक संघर्षों और प्रतिद्वंद्वी देशों की अंतरिक्ष क्षमताओं सहित उभरते खतरों के परिदृश्य पर चर्चा की गई। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि वाणिज्यिक अंतरिक्ष किस प्रकार सैन्य परिणामों को प्रभावित कर रहा है।

चर्चा का मुख्य केन्द्रबिंदु आधुनिक युद्धों में अंतरिक्ष की भूमिका, रणनीतिक संचार, नेटवर्क-केंद्रित संचालन, और विशेष परिस्थितियों में अंतरिक्ष आधारित खुफिया, निगरानी और टोही पर रहा। संगोष्ठी में वरिष्ठ रक्षा और उद्योग नेताओं ने भारत की सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं में बड़े स्तर पर निवेश, तकनीक और एकीकरण की कमी का उल्लेख करते हुए तेजी से प्रगति की आवश्यकता पर जोर दिया।

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