श्रीगंगानगर , अप्रैल 17 -- राजस्थान में अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने शुक्रवार को श्रीगंगानगर में औद्योगिक मजदूरों के हक में बयान जारी करते हुए न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये सुनिश्चित करने की मांग की है।

यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष दुर्गा स्वामी ने यहां जारी बयान में कहा कि महंगाई के इस दौर में मजदूरों का वेतन इतना होना चाहिए कि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। प्रतिगामी श्रम संहिताओं को पूर्ण रूप से वापस ले लिया जाए क्योंकि यह मजदूर विरोधी हैं।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, फरीदाबाद और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे मजदूर विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में श्रीमती स्वामी ने कहा कि मजदूर न्यूनतम वेतन में वृद्धि, आठ घंटे की कार्यावधि, ओवरटाइम पर दुगुना भुगतान, ठेका प्रणाली की समाप्ति और नई श्रम संहिताओं की वापसी की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक मजदूरों पर हो रहे राज्य-प्रायोजित आतंक की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हरियाणा में आधी रात को छापेमारी और उत्तर प्रदेश में अवैध हिरासत जैसी घटनाओं को शासक वर्ग का मजदूर विरोधी रवैया सामने आ गया है। अब शासक वर्ग प्रवर्तन विंग बनकर मजदूरों की भावनाओं को तोड़ने का प्रयास कर रहा है।

श्रीमती स्वामी ने कहा कि ने कहा कि नव उदारवादी नीतियां किसानों को बेदखल कर रही हैं और उसी नीतियों के तहत कारखाना मजदूरों को गुलाम बनाए रखा जा रहा है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हाल में की गई वेतन वृद्धि पूरी तरह अपर्याप्त है। महंगाई के इस समय में 11 हजार से 15 हजार रुपये का वेतन परिवार का गुजारा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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