संतकबीरनगर , अप्रैल 7 -- भारतीय मछुआ महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री शंखलाल मांझी ने मछुआरा समुदाय की उपजातियों को आरक्षण का लाभ देने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित एक सभागार में आयोजित मछुआरा समाज सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मझवार, गौड़, तुरैहा, बेलदार और शिल्पकार जैसी जातियों की कई उपजातियां-जैसे माझी, मुजाविर, केवट, मल्लाह, कहार, कश्यप, धीवर, बिंद, रायकवार, गोड़िया और मेहरा 1930 की जनगणना में स्पष्ट रूप से परिभाषित न होने के कारण आरक्षण के लाभ से वंचित हैं।
उन्होंने मांग की कि 22 दिसंबर 2016 के शासनादेश में वर्णित मछुआरों की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। साथ ही तालाबों और जलाशयों के मत्स्य पालन पट्टों से संबंधित वर्ष 1995 के शासनादेश का पालन सुनिश्चित किया जाए, जिसे उच्चतम न्यायालय द्वारा भी वैध ठहराया जा चुका है।
मांझी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में राजस्व नियमावली और विभागीय निर्देशों के कारण मछुआरा समुदाय के बीच मतभेद पैदा हो रहे हैं, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने मछुआरा समाज के लिए पूर्व की भांति आवास योजनाएं लागू करने तथा आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की भी मांग की।
मांझी ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश भर के लाखों मछुआरे एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
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