जयपुर , सितम्बर 01 -- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने राजस्थान की पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था 'केस रिव्य प्रणाली' की सराहना की है और इसे एक आदर्श मॉडल मानते हुए 'नेशनल बेस्ट प्रैक्टिस' के रूप में रेखांकित किया तथा अन्य राज्यों में भी इसे लागू किये जाने पर बल दिया।

श्री मकवाना राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के साथ मंगलवार को बैठक कर राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण, न्याय प्रणाली तथा कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सकारात्मक एवं विस्तृत चर्चा की।

उन्होंने राजस्थान पुलिस एवं प्रशासन द्वारा मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने हेतु अपनाई गई 'केस रिव्यू प्रणाली' की विशेष रूप से सराहना की। प्रदेश में बंद (क्लोज्ड/एफआर) किये गये मामलों में से 20 प्रतिशत तक की उच्च स्तर पर पुनः जांच एवं गहन समीक्षा की जाती है। यदि इस समीक्षा में जांच संबंधी कोई त्रुटि या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित मामले को पुनः खोलते हुए दोषी अधिकारी के विरुद्ध विजिलेंस जांच भी सुनिश्चित की जाती है।

श्री श्रीनिवास ने श्री मकवानो को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों के संरक्षण तथा उन्हें त्वरित न्याय दिलाने के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस एवं प्रशासनिक स्तर पर की जा रही नियमित समीक्षा के परिणामस्वरूप प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार से संबंधित प्रकरणों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गयी है।

श्री राजीव शर्मा ने बताया कि प्रभावी मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में एससी एवं एसटी अत्याचार के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है तथा 60 दिन के भीतर चालान पेश करने की दर में भी तेज सुधार हुआ है। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास करते हुए बिंदोली/घोड़ी चढ़ने जैसी संवेदनशील घटनाओं की पुलिस द्वारा सतत मैपिंग की जा रही है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर त्वरित एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को एफआईआर तथा चालान के स्तर पर ही समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जा रही है तथा प्रवासी पीड़ितों को भी नियमानुसार त्वरित मुआवजा वितरण सुनिश्चित किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित