बारां , जुलाई 07 -- राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बारां का पहला दौरा मंगलवार को राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

एक ओर श्री खर्रा ने शहरी सेवा शिविर में सुशासन और जनसेवा का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं की नाराजगी, जनप्रतिनिधियों की शिकायतें और पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकने के आरोपों ने दौरे पर सवाल खड़े कर दिए।

श्री खर्रा के आगमन पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विधायक राधेश्याम बैरवा, विधायक ललित मीणा और भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश सिकरवार के नेतृत्व में सर्किट हाउस रोड़ पर उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं की व्यथा सुनने के लिए समय देकर सर्किट हाउस आने को आश्वस्त किया।

दौरे के दौरान उन्होंने नगर परिषद धर्मशाला में आयोजित शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आमजन को योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और त्वरित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन दौरे का दूसरा पक्ष तब सामने आया जब पार्टी कार्यकर्ताओं और पार्षदों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।

जानकारी के अनुसार मंत्री ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों की समस्याएं सुनने के लिए अपराह्न तीन बजे सर्किट हाउस में समय निर्धारित किया था। निर्धारित समय पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पार्षद वहां पहुंच गए, लेकिन मंत्री नहीं पहुंचे। काफी देर तक इंतजार के बाद कार्यकर्ताओं का धैर्य जवाब दे गया और वह सीधे शिविर स्थल पहुंच गए।

शिविर के दौरान भाजपा के युवा नेता दिलीप शाक्यवाल सहित कई कार्यकर्ताओं और पार्षदों ने मंत्री के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक तीखी बहस और असंतोष का माहौल बना रहा। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संगठन और जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सुनने के लिए समय दिया गया था, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।

दौरे के दौरान उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब वहां मौजूद कुछ पत्रकारों ने शहर की सफाई व्यवस्था, घर-घर कचरा संग्रहण, बदहाल सड़कें, जलभराव, पट्टों में कथित गड़बड़ियां और अन्य जनहित के मुद्दों पर मंत्री से सवाल पूछने का प्रयास किया।

आरोप है कि कुछ भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों को सवाल पूछने से रोक दिया। एक स्थानीय पत्रकार ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल पूछने से पहले ही उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार एक स्थानीय कार्यकर्ता और एक विधायक से जुड़े व्यक्ति ने हस्तक्षेप किया, जिससे मौके पर विवाद की स्थिति बन गई और कुछ देर तक माहौल गर्माया रहा।

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