बेंगलुरु , जुलाई 12 -- कर्नाटक के परिवहन मंत्री बी. सुरेश आजकल बेंगलुरु परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बसों में वेश बदलकर जब जवाबदेही, अनुशासन और यात्री सेवाओं की पड़ताल करने के मकसद से औचक निरीक्षण करने निकले तो उन्हें वहां कंडक्टरों और ड्राइवरों की अमानवीयता और मनमानी झेलनी पड़ी।
उन्होंने रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों की मुश्किलों का अनुभव शनिवार को खुद किया। यात्रा के बीच में बीएमटीसी बस के एक कंडक्टर ने पास में खुले पैसे नहीं होने के कारण बस से उतरने के लिए कह दिया।
गौरतलब है कि मंत्री ने शनिवार रात अपनी पहचान छिपाकर 10 से अधिक बीएमटीसी बसों में लगभग दो घंटे तक यात्रा की, ताकि वे आम यात्रियों की तरह सार्वजनिक परिवहन का अनुभव कर सकें। उन्होंने साक्षात देख लिया कि यात्रियों को रोजाना किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सबसे अहम घटना तब हुई जब वे हेब्बल से नागाशेट्टीहल्ली जा रहे थे। मंत्री ने जब टिकट खरीदने के लिए 100 रुपये का नोट दिया, तो कंडक्टर ने टिकट देने से मना कर दिया। उसने कहा कि खुले पैसे नहीं हैं और यात्री को बस से उतरने के लिए कहा। कंडक्टर को यह नहीं पता था कि यात्री राज्य के परिवहन मंत्री हैं। कंडक्टर का यह व्यवहार शहरभर के बस यात्रियों की एक आम शिकायत को उजागर कर गया।
मंत्री के इस औचक निरीक्षण में खुले पैसे की समस्या के अलावा और भी बातें उजागर हुईं। मंत्री ने एक दूसरी बस में देखा कि ड्राइवर और कंडक्टर ने 'फन वर्ल्ड' बस स्टॉप पर बस रोकने के यात्री के अनुरोध को नजरंदाज कर दिया, जिससे यात्री तय स्टॉप पर नहीं उतर पाया। श्री सुरेश ने इसे अस्वीकार्य लापरवाही मानते हुए दोनों कर्मचारियों को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया।
उनकी यात्रा बस नेटवर्क से अलग भी जारी रही। उन्होंने नागाशेट्टीहल्ली में तब दखल दिया जब एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर ने मीटर में 30 रुपये दिखने के बावजूद 36 रुपये मांगे। इससे यात्रियों से अधिक किराया वसूलने की समस्या सामने आई।
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