मंगलुरु , सितंबर 19 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार तड़के अपने दौरे के दौरान मंगलुरु मत्स्य बंदरगाह पर व्यापारिक गतिविधियां ठप पाये जाने पर उपायुक्त तथा पुलिस आयुक्त से रिपोर्ट तलब की और इसके साथ ही उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों या अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
श्री शिवकुमार ने सुबह करीब छह बजे बंदरगाह का औचक निरीक्षण किया और सुविधाओं का जायजा लेने के लिए नाव से यात्रा की। उन्होंने मछुआरों, व्यापारियों और अधिकारियों से बातचीत की तथा बंदरगाह के बुनियादी ढांचे, मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लंगर डालने की सुविधाओं और गाद निकालने की आवश्यकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा, "मैंने डीसी और पुलिस आयुक्त को यह रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है कि बंदरगाह की गतिविधियां क्यों बंद कर दी गयी थीं। अगर इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं तो मैं उन्हें निलंबित कर दूंगा। यदि अनियमितताओं को छिपाने के लिए ऐसा किया गया था, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जायेगी।"मुख्यमंत्री ने मछली व्यापार को रोके जाने पर सवाल उठाया और अधिकारियों को तुरंत गतिविधियों को शुरू कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के व्यवधान से मछुआरों और व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी।
मछुआरों के प्रतिनिधियों चेतन बेंगरे और मोहन बेंगरे ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में लगभग 200 नौकाओं के लिए ही लंगर डालने की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने फाल्गुनी और नेत्रवती नदियों के अरब सागर में मिलने वाले संगम स्थल के पास अतिरिक्त डॉक बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में करीब पिछले 25 वर्षों से गाद नहीं निकाली गयी है, इसलिए इसकी सख्त आवश्यकता है। अधिकारियों ने भी ध्यान दिलाया कि बंदरगाह के पास जमा रेत को हटाना आवश्यक है और नौकाओं की सुरक्षित आवाजाही को सुगम बनाने के लिए दिशा-सूचक तैरते निशान लगाये जाने चाहिए।
श्री शिवकुमार ने अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये और कहा कि छोटे मछुआरों को अपनी नावों को लंगर डालने में आ रही समस्याओं पर जिला प्रभारी मंत्री और अधिकारियों के साथ चर्चा की जायेगी। उन्होंने बंदरगाह पर अवैध निर्माणों और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, "यहां सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया है और अवैध परिसर बना ली गयी हैं। जिस किसी ने भी कानून का उल्लंघन किया है, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली या शक्तिशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।" उन्होंने कहा कि यदि किसी जमीन पर निजी संपत्ति होने का दावा किया जाता है तो सरकार दस्तावेजों की जांच करेगी और कानूनी दायरे के भीतर उचित कदम उठायेगी।
श्री शिवकुमार ने कहा कि मछुआरा समुदाय एक बड़ा समाज है और तटीय अर्थव्यवस्था राज्य का महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना इस समुदाय के लिए अलग विश्वविद्यालय स्थापित करने और शिक्षा, जल-मेट्रो और नीली अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा सीटों की संख्या 40-50 से बढ़ाकर 200 करने की है। सरकार पहले ही 32,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा कर चुकी है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों और जल सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे के लिए 16,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "हम इस बात की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करेंगे कि मंगलुरु और कारवार में व्यापारिक गतिविधियां कहां-कहां चल रही हैं और मछुआरा परिवारों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए योजना तैयार करेंगे।" उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे गोपनीय रिपोर्ट भी मांगेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मछुआरों और व्यापारियों पर कोई दबाव तो नहीं है या इस क्षेत्र में कोई 'माफिया' सक्रिय तो नहीं है।उन्होंने कहा, "व्यापार और कारोबार निष्पक्ष रूप से संचालित होना चाहिए और मछुआरा समुदाय का विकास होना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य है।"मुहाने पर गाद निकालने के लंबे समय से लंबित मुद्दे पर श्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार इस बात की समीक्षा करेगी कि यह काम पट्टे पर देकर कराया जाये या मशीनरी और नौकाएं खरीदकर। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार की तकनीकी समिति से भी परामर्श किया जायेगा।
विपक्ष के नेता आर. अशोक की इस टिप्पणी का जवाब देते हुए कि वे मछली खाने मंगलुरु गये थे , श्री शिवकुमार ने इस पर तंज कसते हुए कहा, "लगता है श्री अशोक की मछली खाने की इच्छा है। चलिए हम मंगलुरु से मछली भेजकर उनकी इच्छा पूरी कर देते हैं।" कई वर्ष पहले ही मछली खाना छोड़ दिये जाने की बात कहते हुए उन्होंने विपक्ष पर तटीय क्षेत्र के विकास पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी करने में अधिक रुचि रखने का आरोप लगाया।
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