भोपाल , अक्टूबर 28 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मध्यप्रदेश के नगर निकायों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कहा है कि केवल नौकरशाही ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब किया जाना चाहिए। पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि जब तक भ्रष्टाचार को मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण का खुलासा नहीं होगा, तब तक इस पर अंकुश लगाना और वास्तविक दोषियों को कटघरे में खड़ा करना मुश्किल है।
जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक प्रतिद्वंद्विता के कारण सामने आए वीडियो को अब दबाने और मामले की लीपापोती करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निकायों में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले अधिकारी ने पहले भविष्य में ऐसी गड़बड़ी होने पर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब 139 लोगों के खिलाफ कार्रवाई होने की जानकारी देते हुए उनके सामाजिक सम्मान का हवाला देकर नाम सार्वजनिक नहीं करने की बात कही जा रही है।
माकपा नेता ने आरोप लगाया कि बिजली बिल जमा नहीं करने पर आम नागरिकों के घरों पर नोटिस चस्पा करने और कुर्की जैसी कार्रवाई करने वाली सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने भ्रष्टाचार की राशि 250 करोड़ रुपये बताए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि पांच रुपये की फिनाइल 33 हजार रुपये, 350 रुपये की एलईडी 11,500 रुपये और दो लाख रुपये की कचरा गाड़ी छह लाख रुपये में खरीदी गई है, तो 11 हजार करोड़ रुपये की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की राशि केवल 250 करोड़ रुपये कैसे हो सकती है।
जसविंदर सिंह ने कहा कि इस मामले की चर्चा देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री और भाजपा की चुप्पी संदेह पैदा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में नौकरशाही के साथ भाजपा नेताओं और मंत्रियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। माकपा ने मांग की कि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी साक्ष्य सार्वजनिक किए जाएं और जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनके नाम भी उजागर किए जाएं।
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