पंचकूला , अगस्त 09 -- भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को समेकित और स्पष्ट किया है। नई व्यवस्था में शिकायतकर्ताओं को भ्रष्टाचार अथवा सतर्कता से जुड़े कदाचार के बारे में विशिष्ट और सत्यापन योग्य तथ्य देने होंगे, जबकि अपनी पहचान गोपनीय रखने के इच्छुक लोगों के लिए अलग से पीआईडीपीआई व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।

सीवीसी ने मास्टर सर्कुलर के जरिए शिकायतों से जुड़े पहले के दिशा-निर्देशों, परिपत्रों और सार्वजनिक सूचनाओं को एक जगह समेकित, अद्यतन और संशोधित किया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और आयोग के अधिकार क्षेत्र के बारे में स्पष्ट जानकारी देना है।

आयोग के मुताबिक शिकायत में भ्रष्टाचार या सतर्कता के दायरे में आने वाले कदाचार का स्पष्ट विवरण और सत्यापन योग्य तथ्य होने चाहिए। आरोपों को क्रमवार और इस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि उनकी जांच और समझ आसान हो सके। सामान्य जन शिकायतों के बजाय सीवीसी का यह तंत्र मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और सतर्कता से जुड़े मामलों के लिए है।

शिकायतकर्ता सीवीसी की शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लिखित शिकायत भी आयोग को भेजी जा सकती है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया है कि शिकायत ई-मेल से नहीं भेजी जानी चाहिए।

प्राप्त प्रत्येक शिकायत को पंजीकृत कर शिकायत संख्या दी जाएगी। इस नंबर की मदद से शिकायतकर्ता सीएमएस पोर्टल पर अपनी शिकायत की स्थिति देख सकेगा। शिकायत पर विचार करने के बाद आयोग जांच का आदेश दे सकता है अथवा आवश्यक कार्रवाई के लिए उसे संबंधित प्राधिकरण को भेज सकता है।

अपनी पहचान गोपनीय रखने वाले शिकायतकर्ताओं के लिए लोकहित प्रकटीकरण एवं सूचना देने वालों के संरक्षण (पीआईडीपीआई) संकल्प, 2004 के तहत अलग व्यवस्था रखी गई है। इससे भ्रष्टाचार की जानकारी देने वाले व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहचान की गोपनीयता की मांग कर सकते हैं।

आयोग ने शिकायतों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए गुमनाम, छद्म नाम वाली, अस्पष्ट या गैर-विशिष्ट शिकायतों के संबंध में भी प्रक्रिया तय की है। ऐसी शिकायतों को बिना आगे की कार्रवाई के बंद किया जा सकता है अथवा उचित होने पर संबंधित प्राधिकरण को भेजा जा सकता है।

सीवीसी ने साथ ही स्पष्ट किया है कि किसी निर्दोष अधिकारी को नुकसान पहुंचाने या परेशान करने के दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से शिकायत किए जाने की बात स्थापित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान का उद्देश्य शिकायत व्यवस्था का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था के जरिए आयोग ने ठोस और सत्यापन योग्य भ्रष्टाचार शिकायतों के निपटारे, शिकायत की स्थिति जानने की सुविधा और पहचान की गोपनीयता के लिए स्पष्ट रास्ता उपलब्ध कराया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित