भोपाल , सितंबर 13 -- राजधानी भोपाल में इस वर्ष स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से पहली मौत हुई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की संक्रमण के साथ गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित थे।

भोपाल में अब तक स्वाइन फ्लू के 65 मरीज सामने आए हैं। इनमें 45 मरीज पिछले 12 दिनों में मिले हैं। फिलहाल एच1एन1 की जांच केवल एम्स भोपाल में हो रही है, जबकि गांधी मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच की सुविधा शुरू नहीं हुई है।

जांच व्यवस्था के बीच गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। अब तक गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच की गई है। मौसम में बदलाव और नमी के बीच सर्दी-खांसी, बुखार तथा सांस संबंधी संक्रमण के मरीज भी अस्पतालों की बाह्य रोगी विभाग में पहुंच रहे हैं।

गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक एवं पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के अनुसार मौसम में बदलाव, नमी और ठंडक के कारण वायरल श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ती हैं, जिनमें एच1एन1 भी एक प्रमुख कारण है। पिछले करीब तीन महीने से इस तरह के लक्षण वाले मरीज लगातार आ रहे हैं। हालांकि अभी मरीजों की संख्या असामान्य या महामारी जैसी स्थिति में नहीं है।

डॉ. दवे ने बताया कि इंफ्लूएंजा के करीब 95 प्रतिशत मामले बिना भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं। मरीजों को लक्षणों की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखा जाता है। सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर हर मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण और उसकी स्थिति के आधार पर जांच की आवश्यकता तय करते हैं।

बुजुर्गों के अलावा हृदय रोग, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। गंभीर मरीजों की संख्या कम होती है, लेकिन फ्लू से निमोनिया जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होने या लक्षण तेजी से बढ़ने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है। ऑक्सीजन की कमी वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर आईसीयू सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

डॉ. दवे के अनुसार लक्षण होने पर मरीज को अन्य लोगों से अलग रहना चाहिए तथा पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना चाहिए। मास्क लगाने और नियमित रूप से हाथ धोने से संक्रमण के फैलाव को कम किया जा सकता है। सर्दी-खांसी और बुखार होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा नहीं लेने तथा एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह से ही लेने की सलाह दी गई है। लक्षण बढ़ने पर तत्काल दोबारा डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा का टीका उपलब्ध है। इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70 प्रतिशत तक बताया गया है। उच्च जोखिम वाले मरीज चिकित्सकीय सलाह से टीका लगवा सकते हैं। एग एलर्जी वाले लोगों को टीका लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की बात कही गई है।

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