भोपाल , अक्टूबर 25 -- कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने भोपाल विकास योजना 2047 के प्रारूप पर आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि नया मास्टर प्लान कानूनी खामियों से भरा है और इसमें आम लोगों की जरूरतों के बजाय वाहनों की आवाजाही पर अधिक ध्यान दिया गया है। उन्होंने म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 18 के तहत संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश को लिखित आपत्ति सौंपकर प्रारूप में संशोधन की मांग की है।
श्री दुबे ने कहा कि भोपाल की पिछली विकास योजना वर्ष 2005 में समाप्त हो गई थी और जनवरी 2006 से शहर नई प्रभावी योजना के बिना चल रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस सरकार ने अपने 15 माह के कार्यकाल में विकास योजना 2031 का प्रारूप प्रकाशित किया था, जिस पर तीन हजार से अधिक आपत्तियों की सुनवाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। उन्होंने इतने लंबे समय तक नई योजना लागू नहीं होने पर भी सवाल उठाए।
श्री दुबे ने प्रारूप में कानूनी कमियां बताते हुए कहा कि वर्ष 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का राजपत्र में उल्लेख होने के बावजूद उसका विधिवत प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करने और अंगीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उन्होंने नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं नहीं दिखाए जाने, आरक्षित निजी भूमि के लिए क्षतिपूर्ति व्यवस्था की जरूरत और शहर के सभी 18 जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण की मांग भी उठाई। उन्होंने वर्ष 2005 की योजना के हरित क्षेत्रों और ग्रीन बेल्ट में हुए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लगभग 45 लाख की आबादी के लिए तैयार योजना में सार्वजनिक परिवहन के लक्ष्य, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के क्षेत्र में लगभग 9,500 हेक्टेयर भूमि को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र घोषित किए जाने के बावजूद घनत्व, एफएआर, सस्ते आवास और पार्किंग सीमा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान बाद की योजनाओं पर छोड़ने पर आपत्ति जताई।
उन्होंने 51 किलोमीटर लंबे और 75 मीटर चौड़े बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सघन मिश्रित विकास के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, करीब 2,449 हेक्टेयर क्षेत्र को टीओडी जोन बताना उचित नहीं है, क्योंकि वहां मेट्रो, मास ट्रांजिट या बस प्राथमिकता लेन की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने चेताया कि इससे बायपास पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है और रोजगार तथा व्यावसायिक गतिविधियां शहर की परिधि की ओर खिसक सकती हैं।
श्री दुबे के मुताबिक, प्रारूप में आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से अधिक और घनत्व कम है, जबकि व्यावसायिक, औद्योगिक तथा परिवहन संबंधी भूमि मानकों से कम है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 4.8 लाख झुग्गीवासियों वाले शहर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के आवास के लिए भूमि आरक्षित नहीं की गई है। उनके अनुसार, योजना में बगीचों, खेल मैदानों, बॉटनिकल गार्डन और लेक फ्रंट के लिए कुल 3,153 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जबकि संबंधित मानकों के आधार पर 4,500 से 5,400 हेक्टेयर खुले स्थान की जरूरत होगी।
उन्होंने पानी की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं पर भी चिंता जताई। श्री दुबे ने दावा किया कि 45 लाख की आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी का अनुमान है, लेकिन इसकी पूर्ति का स्रोत स्पष्ट नहीं किया गया। उनके अनुसार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल शोधन संयंत्र और बिजली सब-स्टेशनों के लिए भूमि चिन्हित नहीं है। शहर के बाहरी विस्तार पर लगभग 59 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान होने के बावजूद वित्तीय योजना का अभाव भी उन्होंने बताया।
श्री दुबे ने मांग की कि धारा 15 के तहत अद्यतन भूमि उपयोग मानचित्र को विधिवत अंगीकृत कर संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित किया जाए। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के स्पष्ट लक्ष्य, प्रभावी टीओडी प्रावधान, बायपास पर मास ट्रांजिट या बस प्राथमिकता लेन, मानकों के अनुरूप भूमि उपयोग, पर्याप्त बगीचे और खेल मैदान, सस्ते आवास, वर्ष 2047 तक की जल योजना तथा विस्तृत वित्तीय योजना शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों से भोपाल को कानूनी रूप से मजबूत और जनहितकारी मास्टर प्लान मिल सकेगा।
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