भोपाल , अगस्त 05 -- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से जुड़े मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता रहवासियों ने कहा है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होकर नगर निगम की हालिया कार्रवाई से संबंधित फोटो और वीडियो न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
शहर के अरेरा कॉलोनी सहित अनेक आवासीय क्षेत्रों के रहवासी लंबे समय से आवासीय भूखंडों पर हो रहे व्यावसायिक निर्माण और गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल नगर निगम ने पिछले दिनों आवासीय क्षेत्रों में संचालित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अनेक दुकानों को सील किया था। कार्रवाई के बाद कुछ व्यापारियों ने स्वेच्छा से भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।
इस बीच रविवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। बैठक में मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे, नगर एवं ग्राम निवेश आयुक्त कौशलेंद्र विक्रम सिंह, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तथा नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपे। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद सोमवार को अधिकांश दुकानें पुनः खुल गईं।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को सील करने के लिए नोटिस जारी किए थे, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और प्रतिष्ठानों का दोबारा खुलना भी न्यायालय की भावना के अनुरूप नहीं है।
उधर, कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि भोपाल में पिछले करीब 20 वर्षों से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को शीघ्र नया मास्टर प्लान लागू करना चाहिए तथा गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।
वहीं, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी व्यापारियों के हित में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में हजारों व्यापारी वर्षों से आवासीय परिसरों से ही अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं तथा नियमित रूप से व्यावसायिक दरों पर कर और अन्य शुल्कों का भुगतान भी कर रहे हैं।
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