उज्जैन , जनवरी 15 -- भारत तिब्बत समन्वय संघ ने मांग की है कि धार स्थित महाराजा भोज द्वारा निर्मित भोजशाला में मां सरस्वती की प्रतिमा की विधि-विधान से अखंड पूजा की जाए। संघ ने कहा है कि आगामी बसंत पंचमी 23 जनवरी को भोजशाला में अखंड पूजा आयोजित की जानी चाहिए।

भारत तिब्बत समन्वय संघ के मालवा प्रांत अध्यक्ष शिवेंद्र तिवारी ने आज यहां जारी विज्ञप्ति में बताया कि संघ के केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र प्रताप सिंह तोमर के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने हाल ही में धार जाकर भोजशाला का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि भोजशाला में मौजूद प्रत्येक खंभा और उस पर उकेरे गए प्रतीक चिन्ह इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि यह स्थल मां सरस्वती का मंदिर रहा है।

श्री तिवारी के अनुसार मुगल शासक खिलजी द्वारा हिंदुओं को अपमानित करने के उद्देश्य से इस स्थल को क्षतिग्रस्त कर मस्जिद बनाने का प्रयास किया गया था। संघ ने मांग की है कि बसंत पंचमी के अवसर पर यहां अखंड पूजा को किसी भी प्रकार से खंडित न किया जाए।

संघ ने यह भी मांग की है कि मां सरस्वती की वह प्रतिमा, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में बताई जा रही है, उसे ससम्मान भारत वापस लाया जाए और भोजशाला में ही विधि-विधान से उसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाए।

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