भोपाल , मई 15 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन याद ने धार स्थित भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया है।

डॉ. यादव ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय स्वागतयोग्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने के निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार आवश्यक प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव सर्वधर्म समभाव, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। राज्य सरकार न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार भोजशाला को संरक्षित स्मारक और वाग्देवी मंदिर माना गया है। अदालत ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है, जबकि मुस्लिम समुदाय के नमाज अदा करने के अधिकार को निरस्त कर दिया है। निर्णय के अनुसार भोजशाला का प्रबंधन एवं नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन रहेगा।

अदालत ने केंद्र सरकार को लंदन स्थित संग्रहालय से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने संबंधी प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही मुस्लिम समुदाय को अन्य उपयुक्त भूमि आवंटन के लिए सरकार के समक्ष प्रस्तुतिकरण देने की छूट दी गई है।

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