धार , मई 15 -- मध्यप्रदेश में धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज शुक्रवार को इंदौर उच्च न्यायालय का फैसला आने की संभावना के मद्देनजर शहर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करते हुए लगभग 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।
भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन संरक्षित स्मारक है। हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से इसके धार्मिक स्वरूप को लेकर विवाद चल रहा है। मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय का फैसला आज आने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार धार, झाबुआ, बड़वानी सहित इंदौर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 15 एसडीओपी, पांच डीएसपी और दो दर्जन थाना प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शहर को पांच जोन और कई सुरक्षा स्तरों में विभाजित किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक किसी भी सूचना पर क्विक रिस्पांस टीम लगभग ढाई मिनट में मौके पर पहुंच जाएगी। शहर की ऊंची इमारतों पर भी जवानों की तैनाती की गई है और पुलिस मोबाइल वाहन लगातार गश्त कर रहे हैं। वही आज शुक्रवार होने के कारण भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
धार जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने जिलेवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक अथवा भड़काऊ सामग्री सोशल मीडिया पर साझा नहीं करें। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जिलेभर में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं, जो पांच जून 2026 तक प्रभावशील रहेंगे। होटल और लॉज संचालकों को आगंतुकों का रिकॉर्ड रखने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता आशीष गोयल तथा मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने भी सभी समुदायों से शांति बनाए रखने और न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने की अपील की है। हिंदू पक्ष ने भोजशाला को प्राचीन सरस्वती मंदिर बताते हुए इसे हिंदू समाज को सौंपने की मांग की है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे मस्जिद और कमाल मौला दरगाह परिसर का हिस्सा बताते हुए पूर्व स्थिति बनाए रखने का आग्रह किया है।
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