धार , मई 29 -- इंदौर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहली बार भोजशाला पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता, यूट्यूबर, लेखक और 'सनातन महासंघ' नामक संगठन के संस्थापक गौतम खट्टर ने मां सरस्वती के दर्शन किए और भोजशाला को पूर्णतः शाश्वत मंदिर बताते हुए लंदन में स्थित मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग की।
भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें भोजशाला के इतिहास और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। इस दौरान गौतम खट्टर ने कहा कि पिछली यात्रा की तुलना में अब भोजशाला में बड़े परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद यहां नमाज पूरी तरह बंद हो चुकी है और अब नियमित रूप से आरती की जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए लंदन में स्थित मां सरस्वती की एक हजार वर्ष पुरानी प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में पुनर्स्थापित किया जाए।
भोजशाला मुद्दे पर श्रेय लेने की राजनीति को लेकर खट्टर ने कहा कि समाज के संघर्षों का श्रेय अक्सर नेता ले लेते हैं, लेकिन लोगों को उन व्यक्तियों और अधिवक्ताओं को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने लंबे समय तक इस मामले में संघर्ष किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और भोपाल के अधिवक्ताओं की टीम के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार और नेता वास्तव में इच्छाशक्ति रखते हैं तो भोजशाला के बाहर स्थित गुंबद वाले ढांचे तथा प्राचीन सरस्वती कूप, हनुमान मंदिर और शिव मंदिर के स्वरूप को भी मूल रूप में लाने की दिशा में कार्य करें।
गौतम खट्टर ने यह भी कहा कि राजा भोज के काल में निर्मित विजय मंदिर वर्तमान में लाट मस्जिद के रूप में परिवर्तित है। उन्होंने कहा कि यदि नेता श्रेय लेने के इच्छुक हैं तो विजय मंदिर को उसके मूल स्वरूप में लौटाने का प्रयास करें।
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