धार , जुलाई 17 -- मध्यप्रदेश में धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के समीप नमाज़ की व्यवस्था को लेकर हिंदू पक्ष ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए नमाज़ की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर की जाए।
हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर बताया गया है तथा परिसर में नमाज़ की अनुमति नहीं है। उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय ने भोजशाला परिसर के निकट खुले स्थान पर नमाज़ की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के अनुसार भोजशाला के 100 मीटर क्षेत्र को संरक्षित तथा 200 मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को विनियमित माना गया है। ऐसे में नमाज़ की व्यवस्था इस पूरे 300 मीटर के दायरे से बाहर की जानी चाहिए।
ज्ञापन में हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि जिस स्थान पर नमाज़ की व्यवस्था किए जाने की चर्चा है, वह कब्रों से घिरा हुआ क्षेत्र है। उनका दावा है कि इस्लामी परंपरा के अनुसार कब्रिस्तान में नमाज़ नहीं पढ़ी जाती, बल्कि वहां फातिहा पढ़ी जाती है। इसलिए उस स्थान पर नमाज़ की व्यवस्था उचित नहीं होगी।
हिंदू पक्ष ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1942 में तत्कालीन धार नरेश द्वारा बख्तावर मार्ग पर रहमत मस्जिद का निर्माण कराया गया था, इसलिए नमाज़ के लिए उसी मस्जिद का उपयोग किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में प्रशासन से शहर में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए नमाज़ की व्यवस्था भोजशाला परिसर के 300 मीटर के दायरे से बाहर करने का आग्रह किया गया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
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