पटना , अक्टूबर 06 -- ाज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए चल रहे भू-अर्जन की प्रक्रिया में तेजी लाने और उससे जुड़ी सामाजिक एवं व्यावहारिक अड़चनों को दूर करने के लिए मंगलवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भू-अर्जन निदेशालय की बैठक हुई। मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य के प्रमुख सामाजिक अध्ययन एवं प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलों से भू-अर्जन के दौरान सामने आने वाली 10 प्रमुख समस्याओं की जानकारी मंगाई जाए। इन समस्याओं का संस्थागत स्तर पर अध्ययन कर उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भू-अर्जन की प्रक्रिया को केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। परियोजनाओं के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों, उनकी आजीविका, सामुदायिक संपत्तियों और व्यापक सामाजिक प्रभाव का भी समुचित आकलन जरूरी है।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि विकास परियोजनाओं को गति देने के साथ-साथ प्रभावित लोगों की भावनाओं और सामाजिक हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले परिवारों की संख्या, उनकी आजीविका और सामुदायिक संपत्तियों के साथ-साथ परियोजना के सामाजिक प्रभाव का भी अध्ययन किया जाए।
मंत्री ने भू-अर्जन से नाखुश किसानों से सीधे संवाद करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आपत्तियों और असंतोष के वास्तविक कारणों को समझने के लिए उनसे बातचीत की जाए। समस्याओं के कारणों का अध्ययन कर उसके आधार पर समाधान की कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि किसी विकास परियोजना के निर्माण में कोई धार्मिक स्थल बाधा बन रहा है और स्थानीय समाज उसके स्थानांतरण के लिए सहमत है, तो नियमानुसार उचित सेटलमेंट, पुनर्वास एवं आवश्यक मुआवजे की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को भी भेजे जाएंगे।
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