चंडीगढ़ , जुलाई 02 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भूमि अधिग्रहण के दौरान भू-स्वामियों को मिलने वाले लाभ बढ़ाने और विस्थापित (ओस्टी) नीति में संशोधन को मंजूरी दी गयी।

सरकार ने दावा किया है कि इन बदलावों से भूमि मालिकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान होगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार, संशोधित नीति के तहत आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों श्रेणियों का विकल्प चुनने वाले भू-स्वामियों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज आवासीय भूखंड का अधिकार पहले की तरह मिलेगा, जबकि व्यावसायिक भूखंड का अधिकार 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। यदि कोई भू-स्वामी केवल आवासीय भूखंड का विकल्प चुनता है, तो अब उसे प्रति एकड़ 1,630 वर्ग गज आवासीय भूखंड मिलेगा, जो पहले 1,600 वर्ग गज था। व्यावसायिक परियोजनाओं में व्यावसायिक भूखंड का अधिकार 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है।

कैबिनेट ने विस्थापित (ओस्टी) नीति में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत जिन किसानों की एक एकड़ भूमि अधिग्रहित होगी, उन्हें 200 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा। एक एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक भूमि अधिग्रहित होने पर 300 वर्ग गज तथा 2.5 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित होने पर 500 वर्ग गज का प्लॉट दिया जाएगा।

सरकार ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) का प्रावधान भी मंजूर किया है। इसके अलावा सहूलियत प्रमाणपत्र (सहूलियत सर्टिफिकेट) की वैधता दो वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष कर दी गयी है। नयी नीति के तहत विकसित प्लॉट पाने वाले मूल भू-स्वामियों को रजिस्ट्री या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क नहीं देने होंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित भूमि की कलेक्टर दर के बराबर मूल्य तक पंजाब में कहीं भी जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में छूट का लाभ भी ले सकेंगे। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि पात्र भू-स्वामियों को एक प्राथमिकता वाला ट्यूबवेल बिजली कनेक्शन दिया जाएगा और नीति में शामिल किसानों को प्राथमिकता वाले स्थानों पर भूखंड आवंटित किये जाएंगे।

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार ने भूमि मालिकों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद उनके सुझावों और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए नीति में संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों और अन्य भू-स्वामियों को अधिक लाभ और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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