बिलासपुर , जून 17 -- पूर्व मुख्यमंत्री एवं पाटन विधायक कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने याचिका निरस्त करने की मांग संबंधी आवेदन खारिज कर दिया है। इसके साथ ही मामले की सुनवाई अब गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर आगे बढ़ेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है, जिसकी जानकारी बुधवार को मीडिया को दी गयी।

प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में मंगलवार को हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भूपेश बघेल ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था। इसी आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई है।

याचिका दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद तथा पाटन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे विजय बघेल द्वारा दायर की गई है। वर्ष 2024 में प्रस्तुत याचिका में कहा गया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान से पूर्व प्रचार-प्रसार प्रतिबंधित अवधि में श्री बघेल ने अपने समर्थकों के साथ पाटन क्षेत्र में रैली एवं रोड शो किया था। आरोप है कि इस दौरान चुनावी नारे लगाये गये तथा मतदाताओं से समर्थन मांगा गया, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है। याचिका में इस संबंध में वीडियो साक्ष्य होने का भी दावा किया गया है।

सुनवाई के दौरान श्री बघेल की ओर से 16 बिंदुओं पर आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि चुनाव याचिका विचारणीय नहीं है। उनका पक्ष था कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है तथा आचार संहिता उल्लंघन का कोई ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी आधार पर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज किए जाने का आग्रह किया गया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी मामले में एक अन्य आवेदन खारिज होने के बाद श्री बघेल ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष न्यायालय ने उन्हें याचिका की विचारणीयता के प्रश्न पर उच्च न्यायालय के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। इसी आदेश के अनुपालन में दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उसे अस्वीकार कर दिया है।

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