वेलिंग्टन , अक्टूबर 26 -- भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मॉर्ने का मानना है कि पिछले दो मैचों में एक विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को उम्मीदों के दबाव से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा है कि उनके पर कौशल और अनुभव है उन्हें लय हासिल करने कुछ समय लगेगा।
तीसरे टी-20 से पहले संवाददाता सम्मेलन में मॉर्कल ने कहा, "देखिए, उनकी वापसी को लेकर मुझे बेहद सहानुभूति है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि चार साल बाद वापसी करने पर उनसे उम्मीदें होना स्वाभाविक है। उन्होंने आईपीएल में असाधारण प्रदर्शन किया था। उनकी गेंदबाजी भी बहुत अच्छी रही है। पहली बात यह है कि उन्हें उम्मीदों के दबाव को स्वयं पर हावी नहीं होने देना चाहिए। दूसरी बात, उनके चयन से पहले करीब एक महीने तक क्रिकेट खेली गई। हां, उन्होंने अभ्यास किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना बिल्कुल अलग चुनौती है, जहां छोटी-छोटी चीजें भी मायने रखती हैं। कार्यक्रम व्यस्त होने के कारण उन्हें स्वयं को तैयार करने के लिए सीमित अभ्यास का ही समय मिला।"भुवनेश्वर 36 साल के हैं और जल्द ही 37 के हो जाएंगे। यह नवंबर 2022 के बाद भारत के लिए किसी भी प्रारूप में उनका पहला मैच था। हालांकि, आईपीएल के लगातार दो सफल सीजन के बाद उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की। उनकी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लगातार दो ख़िताब जीते और इस दौरान भुवनेश्वर ने क्रमशः 17 और 28 विकेट लिए।
उन्होंने ने कहा, "उनके पास स्किल भी है और अनुभव भी। लेकिन आखिर में हमें क्रिकेट के खेल का सम्मान करना होगा और उन्हें कुछ मैचों में अपनी लय हासिल करने का समय देना होगा। जब से वह टीम में आए हैं, तब से मेरा संदेश यही रहा है कि किसी चीज के पीछे भागने की ज़रूरत नहीं है। बस अपने जैसे बने रहो। हां, उम्मीदें रहेंगी, लेकिन हर मैच के साथ आप बेहतर होते जाएंगे और अपनी लय हासिल कर लेंगे। इसलिए बाहर की बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह रणनीति के तहत किया गया बदलाव था। हमें लगा कि उस मैदान पर इसकी ज़रूरत है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि प्रिंस डेथ ओवरों में यॉर्कर डालने में बहुत अच्छे हैं। हमें लगा कि पहले मैच से मिली सीख के आधार पर अगर हमें दूसरी पारी में गेंदबाजी करनी पड़े, गेंद गीली हो और मैदान के आकार को भी ध्यान में रखना हो, तो ऐसे गेंदबाज की जरूरत होगी जिसके यॉर्कर सही जगह पर पड़ने की संभावना अधिक हो।
उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि मयंक ने पहले मैच में बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की थी। इसलिए यह बदलाव उनके प्रदर्शन की वजह से बिल्कुल नहीं हुआ। लेकिन मेरे हिसाब से मयंक जैसे युवा खिलाड़ी के लिए कभी-कभी एक मैच खेलकर थोड़ा समय लेना, अपने प्रदर्शन पर विचार करना और गेंदबाज़ी को समझना अच्छा होता है। वह अभी कच्चे खिलाड़ी हैं और उन्हें यह सीखने की जरूरत है कि मैच की स्थिति को कैसे पढ़ना है और प्रत्येक ओवर की योजना कैसे बनानी है। इसलिए मेरे हिसाब से एक युवा खिलाड़ी के लिए यह बुरी बात नहीं है। प्रिंस तेज गेंदबाज़ी कर सकते हैं और मैच के हर चरण में गेंदबाल करने में सक्षम हैं। उनकी गेंदों को सही जगह पर डालने की क्षमता भी थोड़ी बेहतर है।"मॉर्कल ने मजाकिया अंदाज में कहा, "यह हवा अपने आप में एक अलग ही चुनौती है। आज सुबह मैं होटल में था और पूरी इमारत हिल रही थी। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक नई चीज होगी, जिसकी खिलाड़ियों को आदत डालनी होगी। हमारे पास तैयारी के लिए भी बहुत कम समय होगा। लेकिन हम इस चुनौती का सामना करने के लिए उत्साहित हैं और बहाना बनाने की बजाय हम इससे सीधे निपटना चाहते हैं। मुझे लगता है कि हवा कई चीज़ों को प्रभावित कर सकती है। इसका असर बल्लेबाजी और आपके स्टांस पर पड़ सकता है। कई दूसरी चीजें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। लेकिन जैसा मैंने कहा, आपके पास वॉर्म-अप और अभ्यास का थोड़ा समय होगा, जिसमें आप समझने की कोशिश कर सकते हैं कि हवा आप पर किस तरह असर डाल रही है। लेकिन मैच के समय आपको इन बातों को दिमाग़ से निकालकर हर गेंद को सही जगह डालने और हर गेंद का पूरा फ़ायदा उठाने की कोशिश करनी होगी।"मॉर्कल ने ख़ुद वेलिंग्टन के बेसिन रिज़र्व में दो टेस्ट मैच खेले हैं। इस क्षेत्र में पहले नहीं खेल चुके भारतीय खिलाड़ियों के लिए उनके पास कुछ सलाह भी है।
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