भीलवाड़ा , मई 14 -- राजस्थान में भीलवाड़ा शहर और आसपास के इलाकों में चल रहे निर्माण कार्योंपर अचानक रोक लग गयी है।
अवैध बजरी परिवहन और डंपरों के आतंक पर प्रशासन की सख्ती के बाद अब शहर में बजरी की भारी किल्लत पैदा हो गयी है। आलम यह है कि करोड़ों रुपये के निर्माण परियोजनायें ठप हो गयी हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूरों और कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बजरी की तस्करी पर यह पाबंदी पिछले एक सप्ताह से काफी सख्त की गयी है। दरअसल, पिछले दिनों सदर थाना क्षेत्र में बजरी से भरे एक बेकाबू डंपर ने एक युवक की जान ले ली थी और दो अन्य को घायल कर दिया था। डंपरों के बढ़ते आतंक और लगातार होते हादसों को देखते हुए सांसद दामोदर अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिये कि बजरी की तस्करी और मिलीभगत से चल रहे इस खेल को तुरंत रोका जाये। इसके बाद से ही नदियों से अवैध रूप से लाई जा रही बजरी पर पूरी तरह लगाम लग गयी है।
बजरी की आपूर्ति बंद होने का असर शहर की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। पिछले पांच दिनों में शहर के अधिकतर निर्माण कार्य बंद हो चुके हैं। रोजाना कमाने-खाने वाले मजदूरों और कुशल कारीगरों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
केवल बजरी ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े सीमेंट, लोहे और ईंटों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बिक्री गिरने से व्यापारी चिंतित हैं।
अवैध बजरी की इस खींचतान के बीच आम जनता को भारी आर्थिक चपत लग रही है। निर्माण करवाने वाले लोगों का कहना है कि जो बजरी का डंपर पहले 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाता था, उसकी कीमत अब 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच गयी है। मोटी रकम देने के बाद भी डंपर में बजरी की मात्रा आधी ही आ रही है। इससे मकान बनाने की लागत कई गुना बढ़ गयी है।
काम की तलाश में भटक रहे कारीगरों और मजदूरों का कहना है कि सरकार को बजरी उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस और वैध रास्ता निकालना चाहिए। उनका कहना है कि तस्करों पर लगाम जरूरी है, लेकिन निर्माण कार्यों को सुचारू रखने के लिए सरकार विधिपूर्वक बजरी की सुनिश्चित करे, ताकि हजारों परिवारों का रोजगार बच सके।
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