भीलवाड़ा , अगस्त 29 -- राजस्थान में भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में मचा घमासान अब और तेज हो गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार नेताओं और कार्यकर्ताओं की पत्नियों एवं रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने और वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की दावेदारी दरकिनार करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच भाजपा जिला उपाध्यक्ष मंजू चेचाणी सहित चार महिलाएं शनिवार सुबह प्रदेश नेतृत्व के बुलावे पर जयपुर के लिए रवाना हो गईं, वहीं भीलवाड़ा भाजपा कार्यालय पर कुछ महिला कार्यकर्ताओं का धरना अब भी जारी है।

मंजू चेचाणी ने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय पर धरना देते हुए पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि निगम चुनाव में जमीनी स्तर पर सक्रिय और लंबे समय से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं को टिकट देने के बजाय नेताओं की पत्नियों और रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाया जा रहा है।

सुश्री चेचाणी का आरोप है कि जिन चेहरों का सार्वजनिक क्षेत्र में कोई खास वर्चस्व नहीं है, उन्हें टिकट देने के पीछे राजनीतिक परिवारों को आगे बढ़ाने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे लोगों को निगम चुनाव में उतारकर भविष्य में उन्हें अध्यक्ष पद की दौड़ में आगे करने की तैयारी की जा रही है।

टिकट वितरण से नाराज चेचाणी ने शुक्रवार को धरना शुरू करने के साथ आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी थी। इसके बाद मामला प्रदेश संगठन तक पहुंचा। उन्होंने शुक्रवार पूरी रात भाजपा कार्यालय में धरना दिया। शनिवार सुबह प्रदेश नेतृत्व के बुलावे पर वह मंजू पालीवाल, रेखा पुरी और ज्योति आशीर्वाद के साथ जयपुर के लिए रवाना हो गईं। चारों महिलाएं प्रदेश नेतृत्व के सामने टिकट वितरण को लेकर अपनी आपत्तियां और कार्यकर्ताओं की नाराजगी रखेंगी।

उधर सूत्रों के मुताबिक भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में आधा दर्जन से अधिक ऐसे टिकटों को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा है, जिनमें नेताओं या प्रभावशाली कार्यकर्ताओं के परिवार से जुड़े लोगों को मैदान में उतारे जाने की बात सामने आई है। इसी को लेकर भाजपा के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं में नाराजगी बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि कई वर्तमान पार्षदों और लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे मजबूत दावेदारों को भी दरकिनार कर दिया गया है।

भाजपा के भीतर अब सवाल उठ रहा है कि टिकट वितरण में जमीनी पकड़, जनाधार और जीतने की क्षमता को कितना महत्व दिया गया। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी है कि कई ऐसे चेहरों को टिकट दिया गया है, जिन्हें चुनावी मैदान में न तो मजबूत जनाधार वाला माना जा रहा है और न ही संगठन में उनकी स्वीकार्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट है।

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