भीलवाड़ा , जुलाई 13 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले में मानसून की लंबी सुस्ती ने किसानों और आम जनता की चिंताओं को गहरा कर दिया है, क्योंकि खेतों में बुवाई के बाद अब फसलों को जीवनदान के लिए पानी की सख्त जरूरत महसूस होने लगी है। इस बार अच्छी बरसात नहीं होने के कारण हालात इतने विकट हो गये हैं कि बेबस किसानों को अपने खेतों में दो-दो बार बुवाई करनी पड़ी है। इसके कारण उन पर खेती की लागत का दुगुना आर्थिक भार बढ़ गया है।

पर्याप्त पानी के अभाव में अधिकांश फसलें अब खेतों में ही मुरझाकर दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। क्षेत्र की प्रमुख फसलें जैसे मक्का, मूंग, उड़द और तिल्ली पानी न मिलने से सूख रही हैं, जिससे किसानों की वर्षभर की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।

अगर जल्द ही क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा और फसलों को बचा पाना पूरी तरह नामुमकिन हो जाएगा। आकाश में टकटकी लगाये अन्नदाता अब भगवान इंद्रदेव से राहत की मूसलाधार बारिश की गुहार लगा रहे हैं।

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