भीलवाड़ा , अगस्त 08 -- राजस्थान में भीलवाड़ा जिले में मंगलवार को बच्छ बारस का पर्व पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक वातावरण के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर गांव की महिलाओं ने गोवंश के संरक्षण और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना को लेकर पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही गांव का माहौल उत्सवमय नजर आया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पूजा की थाली सजाये गायों के समीप पहुंचीं। महिलाओं ने गाय और उसके बछड़े को तिलक लगाकर, रोली, अक्षत, मोगरा एवं फूलों की माला पहनाकर विधिवत पूजन किया। इसके पश्चात गौमाता को बाजरे की रोटी, अंकुरित अनाज (चना, मूंग, मोठ) और गुड़ का भोग लगाया गया।
पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने समूह में बैठकर बच्छ बारस से जुड़ी पारंपरिक व्रत कथाएं और लोक कहानियां सुनीं। कथा के माध्यम से गोवंश के महत्व, उनके प्रति दयाभाव और गोसेवा के संस्कारों को याद किया गया। इस पर्व के नियम के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाओं ने आज चाकू से कटी हुई किसी भी वस्तु का सेवन नहीं किया और न ही गेहूं एवं गाय के दूध से बने खाद्य पदार्थों का उपयोग किया।
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