भीलवाड़ा , जुलाई 11 -- राजस्थान में भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में शुक्रवार को एक और प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय चिकित्सकों की समिति गठित कर दी है।

इस अस्पताल में मार्च से अब तक कुल नौ प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इनमें जुलाई में अब तक पांच मौतें दर्ज की गई हैं। महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच समिति गठित की गई है। समिति शीघ्र अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर एमसीएच के ऑपरेशन थिएटर को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है।

हालिया मामलों में पांच जुलाई को शिमला गुर्जर (28), सात जुलाई को फोरी देवी, आठ जुलाई को इशा पांडे, नौ जुलाई को दिव्या और 10 जुलाई को पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) की मौत हुई। वहीं, सात जून को कल्याणपुरा मंडी निवासी संजना जीनगर की सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत बिगड़ने पर उन्हें अजमेर भेजा गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सभी मामलों में मृतक महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को संगीता जीनगर की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन करके हंगामा भी किया।

उधर, ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (कल्चर टेस्ट) रिपोर्ट पॉजिटिव आने से मामला और गंभीर हो गया है। रिपोर्ट के बाद संक्रमण की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौतों का कारण चिकित्सकीय जटिलताएं हैं। प्रशासन के अनुसार अधिकतर मामलों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म, एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया, पीआईएच, एक्लेम्पसिया, दौरे (सीजर) और अन्य प्रसूति संबंधी जटिलताएं सामने आई हैं।

राज्य में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। मई में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया, जिनमें दो की मौत हो गई। वहीं शुक्रवार को बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भी दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। इन सभी मामलों में परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप लगाए थे।

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