भुवनेश्वर , सितंबर 6 -- ओडिशा के भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान में खारे पानी के मगरमच्छों (सॉल्टवॉटर क्रोकोडाइल) के आश्रय स्थलों से सैकड़ों बच्चे बाहर निकलने लगे हैं। ये नवजात बच्चे पास की क्रीक और जल निकायों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे इस आर्द्रभूमि का भारत में इस प्रजाति के सबसे बड़े गढ़ के रूप में दर्जा एक बार फिर साबित हुआ है।

बच्चों का आश्रय स्थलों से बाहर निकलना तीन दिन पहले शुरू हुआ था और अगले 15 दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है। भारत के तटीय या खारे पानी के मगरमच्छों की कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा भितरकानिका में पाया जाता है। वर्ष 1975 में शुरू किए गए संरक्षण कार्यक्रम के बाद से यहां इस प्रजाति की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जो 1975 में महज 96 थी और अब बढ़कर 1,858 तक पहुंच गई है।

वन अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष राष्ट्रीय उद्यान में मगरमच्छों के 117 आश्रय स्थल चिन्हित किए गए थे। मादा मगरमच्छ आमतौर पर 50 से 60 अंडे देती हैं, जिनसे लगभग 70 से 80 दिनों के काल के बाद बच्चे बाहर आते हैं। नवजात बच्चे आश्रय स्थलों से निकलकर शुरुआत में आसपास ही चहलकदमी करते हैं और फिर प्राकृतिक रूप से पानी के स्रोतों का रुख करते हैं। हालांकि, इनके जीवित रहने की दर काफी कम है। मगरमच्छ शोधकर्ता सुधाकर कर के अनुसार, जलीय जीवों और अन्य शिकारियों के खतरे के कारण 100 में से बमुश्किल एक बच्चा ही वयस्क होने तक जीवित रह पाता है।

प्रजनन और आश्रय स्थल बनाने की प्रक्रिया को बाधित होने से बचाने के लिए इस वन्यजीव अभयारण्य को 31 मई से 31 जुलाई तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था।

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