भिण्ड , अप्रैल 18 -- मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के भिण्ड जिले में सिंध नदी में पनडुब्बी के माध्यम से हो रहे अवैध रेत उत्खनन के विरोध में संत समाज ने पदयात्रा शुरू कर आंदोलन का स्वर तेज कर दिया है। प्रशासन पर अनदेखी और एनजीटी के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए संत समिति ने नदी संरक्षण सहित सात सूत्रीय उद्देश्यों को लेकर 'सनातन पदयात्रा' प्रारंभ की है।

पदयात्रा पहले दिन भिण्ड से फूप तक पहुंची, जबकि आज यह फूप से ऊमरी तक जाएगी। संत गांव-गांव पहुंचकर नदियों के संरक्षण और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश दे रहे हैं।

संतों का आरोप है कि सिंध नदी में अवैध तरीके से पनडुब्बी डालकर रेत निकाली जा रही है और प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद एनजीटी के नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। रेत खदान संचालित करने वाली कंपनी पर भी नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं। पदयात्रा के पहले दिन दंदरौआ धाम के संत महामंडलेश्वर रामदास महाराज सहित अन्य संत मौजूद रहे। उन्होंने नदियों के संरक्षण और अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज ने पदयात्रा के सात प्रमुख उद्देश्य बताते हुए कहा कि इनमें नदियों का संरक्षण, अवैध उत्खनन पर रोक, गांव की बेटी को अपनी बेटी मानने की भावना, गो रक्षा, नशाबंदी, झूठी शान में होने वाले विवादों पर रोक, घरों में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और बच्चों को मोबाइल की लत से दूर कर संस्कारों से जोड़ना शामिल है।

उन्होंने कहा कि नदियां हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके संरक्षण के लिए समाज को जागरूक होना जरूरी है। अवैध उत्खनन से नदी का मूल स्वरूप और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। संतों ने सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते हुए कहा कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना आवश्यक है, साथ ही नशाखोरी और आपसी विवाद जैसी समस्याओं को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

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