गांधीनगर , फरवरी 20 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मातृभाषा दिवस के गरिमामय समारोह में शुक्रवार को कहा कि मातृभाषा के गौरव गान के साथ अन्य भाषाओं के प्रति आदर ही हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति है।

श्री पटेल ने इस अवसर पर वर्ष 2024 का साहित्य गौरव पुरस्कार गुजराती भाषा के लिए प्रवीण दर्जी को तथा कच्छी भाषा के लिए मावजी महेश्वरी को प्रदान किया और गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा युवा लेखकों-साहित्यकारों को दिए जाने वाले युवा गौरव पुरस्कार अंतर्गत अजय सोनी तथा दीपक नंदा को वर्ष 2024 के क्रमशः गुजराती तथा कच्छी भाषा साहित्य के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारी मातृभाषा 'अ' से शुरू होकर सबसे शीर्ष पर 'ज्ञ' यानी ज्ञान तक विस्तृत है। हृदय के भाव एवं संवेदनाओं को भाषा से प्रकट करने का हमारा प्रयास मातृभाषा के ऐसे समृद्ध ज्ञान द्वारा ही व्यक्त हो सकता है। हमारी भाषा एवं संस्कृति को जीवंत रखकर आगामी पीढ़ी तक पहुँचाना समय की मांग है।

मुख्यमंत्री विश्व मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर आज गांधीनगर में गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा मातृभाषा महोत्सव अंतर्गत आयोजित साहित्य गौरव पुरस्कार समारोह के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। समारोह में युवा, सेवा एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ राज्य मंत्री डॉ. जयराम गामित भी उपस्थित थे।

'माँ, मातृभूमि तथा मातृभाषा का कोई सानी नहीं है।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कथन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृभाषा का गौरव करने वाला कोई भी व्यक्ति उनके लिए गौरवरूपी है। उन्होंने मातृभाषा को सामूहिक अस्तित्व तथा स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि श्री मोदी ने देशवासियों में ऐसा ही स्वाभिमान सोमनाथ स्वाभिमान पर्व तथा विरासतों व संस्कृति के पुनरुत्थान से जगाया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित