नयी दिल्ली , अप्रैल 27 -- भारत और न्यूज़ीलैंड ने सोमवार को राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में एक महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें भारतीय की सभी वाणिज्यक वस्तुओं को वहां के बाजार में शून्य- शुल्क पर प्रवेश मिलेगा और वहां से निर्यात की जाने वाली विभिन्न श्रेणी की वस्तुओं में से 70 प्रतिशत को यहां शून्य शूल्क पर प्रवेश का प्रावधान है।
भारत मंडपम में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और व्यवसाय जगत के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा न्यूलीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले से भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये। यह समझौते से दोनों देशों के बीच 95 प्रतिशत व्पापार के लिए व्यवस्था मुक्त की जा रही है ।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और न्यूज़ीलैंड ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जो आर्थिक साझेदारी और अवसरों के नए युग की शुरुआत करता है। न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री ने कहा कि यह समझौता "एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला" अवसर है और द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि विकसित भारत-2047 के सपनों के साथ जुड़ा यह समझौता नयी पीढ़ी का व्यापार समझौता है जिसमें शुल्क मुक्त व्यापार, प्रतिभाओं को मूल्य देने , निवेश और कृषि उत्पादकता को प्रोत्साहन के उपाय शामिल हैं। इससे भारत के युवाओं, किसानों, महिलाओं, कारीगरों और एमएसएमई इकाइयों को लाभ होगा।
इस समझौते पर सहमति की घोषणा गत दिसंबर में ही कर दी गयी थी। समझौते में औषधियों के द्विपक्षीय व्यापार को आसान बनाने की प्रक्रिया को तीव्र किये जाने, कृषि उत्पादकता साझेदारी, प्रतिभाओं की आवाज, आयुष उत्पादों को मान्यता और उसके तथा बौद्धिक संपदा के महबूत संरक्षण की व्यवस्था है।
इस समझौते से भारत के वस्त्र, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग वस्तुएं और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए निर्यात बढ़ानेका मौका मिलेगा साथ ही खेती, मत्स्य और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
श्री गोयल ने कहा कि इससे न्यूजीलैंड को भारत में वाइन का निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा जबकि भारत से वहां व्हिस्की, रम और जिन जैसे उत्पादों के निर्यात के बेहतर अवसर मिलेंगे। सरकार ने कहा है कि इस समझौते में भारतीय किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए डेयरी और प्रमुख कृषि उत्पादों जैसे कॉफी, दूध, क्रीम, पनीर, दही, व्हे, केसिन, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर को बाजार पहुंच से बाहर रखा गया है।
न्यूज़ीलैंड ने भारत के सेवा उद्योग को भी प्रवेश देने का फैसला किया है जो उसकी ओर से अब तक किसी देश को दी गयी सबसे अच्छी बाजार प्रवेश की व्यवस्था बताया गया है। इसके तहत 118 सेवा क्षेत्रों को शामिल किया गया है । इसमें कंप्यूटर सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल, दूरसंचार, निर्माण और पर्यटन सेवा आदि शामिल हैं। समझौते में भारत की ओर से लगभग 139 उप-क्षेत्रों में "मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) " की प्रतिबद्धता दी गयी है। यानी इन क्षेत्रों में विश्व व्यापार संगठन के तहत अन्य देशों के लिए प्रस्तुत किया किया जा रहा बाजार प्रवेश की अनुकूलत व्यवस्था लागू होगी ।
न्यूजीलैंड ने भारतीय को अपने यहां अध्ययन के बाद वर्क वीजा और पेशेवर अवसर देने का प्रस्ताव किया है। इस पर संख्या की सीमा नहीं है।
न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री मैक्ले ने इस अवसर पर कहा कि यह भी कहा कि न्यूज़ीलैंड की लगभग 6 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है, जो विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हैं जिसमें क्रिकेट का विशेष योगदान है। उन्होंने इस अवसर पर वाणिज्य मंत्री को क्रिकेट पर केंद्रित एक विशेष उपहार भी दिया जिसमें श्री गाेयल उन्होंने दोनों देशों की टीमों के बीच एक मैच से पहले उन्हें गेंद डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं से भरे इस युग में यह यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद साझेदारियां अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। उन्होंने भारत को एक महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था बताया जो जल्दी ही दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनाने की ओर बढ़ रही है।
दोनों पक्षों ने इस समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन पर काम करने के लिए प्रतिबद्धता जतायी है।
इस समझौते के लिए बातचीत 16 मार्च 2025 को शुरू हुई और 22 दिसंबर 2025 को सहमति की घोषणा की गयी। यह भारत द्वारा विकसित देशों के साथ सबसे तेज़ी से किए गए समझौतों में से एक है।
श्री गोयल ने अपने संबोधन में कि कहा कि यह समझौता भारत के वैश्विक आर्थिक जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और किसानों, महिलाओं, युवाओं और उद्यमियों को सशक्त करेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यातकों को बराबरी का अवसर देगा और उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित