वाराणसी , अक्टूबर 14 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी वर्ष समारोह में हिस्सा लिया और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ ने विषम परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इस संगठन ने राष्ट्रवाद को अपने जीवन का ध्येय और राष्ट्र की उन्नति को अपनी उन्नति का माध्यम बनाया।
योगी ने कहा कि ठीक 100 वर्ष पहले वर्ष 1926 में इसी काशी में महान साधक स्वामी प्रणवानन्द जी महाराज ने भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा का शुभारंभ किया था। अक्सर संकट के समय लोग अपने मूल्यों और आदर्शों को छोड़ देते हैं तथा सिद्धांतों से विमुख हो जाते हैं, लेकिन भारत सेवाश्रम संघ ने हमेशा अपने सिद्धांतों को सर्वोपरि रखा है। इस संस्था के साथ हम सभी का विशेष लगाव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश गुलाम था, तब स्वामी प्रणवानन्द जी महाराज ने देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर स्वतंत्रता की अलख जगाई। उन्होंने हिंदू जागरण के महान कार्य को भी अपने हाथों में लिया और महान भारत के निर्माण तथा स्वतंत्र भारत के संकल्प को साकार करने में योगदान दिया। महान संन्यासी द्वारा स्थापित यह संस्था आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा का प्रभावी ढंग से प्रचार-प्रसार कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि स्वामी प्रणवानन्द जी महाराज ने वर्ष 1912-13 में जिस स्थान पर दीक्षा ग्रहण की थी, वह गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ है। उस समय उन्होंने बाबा गंभीरनाथ जी के सानिध्य में रहकर लंबे समय तक आध्यात्मिक साधना की। गोरखपुर से लेकर काशी और फिर पूरे देश में उन्होंने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया। उन्होंने व्यक्तिगत उन्नति के बजाय राष्ट्र की उन्नति को प्राथमिकता दी।
योगी ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी विरासत, आध्यात्मिक धरोहर, धर्म और संस्कृति पर भी संकट आता है। यदि विदेशी आक्रांता सफल नहीं हुए होते, तो क्या बाबा विश्वनाथ की पावन धरा पर उनके मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस किया जा सकता था? क्या राम जन्मभूमि पर 500 वर्षों की गुलामी का कलंक बना रहता? क्या भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर गुलामी का कलंक कायम रहता? उन्होंने कहा कि यह सब उस ऐतिहासिक भूल का परिणाम है, जो देश के विभाजन और आपसी बंटवारे के रूप में सामने आई।
इसी का परिमार्जन करने के लिए संतों ने अलग-अलग कालखंडों में अपने आध्यात्मिक अभियान के माध्यम से व्यापक जागरण का कार्य किया। स्वामी प्रणवानन्द जी महाराज ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ में पूजा केवल भोग से ही नहीं, बल्कि अस्त्र-शस्त्र से भी होती है। शस्त्र पूजन की वस्तु हैं और आवश्यकता पड़ने पर आत्मरक्षा के लिए उन्हें धारण भी करना पड़ता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वहां की सरकार भारत सेवाश्रम संघ संन्यासियों को धमकाने लगी थी, तब वह उत्तर प्रदेश से पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे थे।
उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि संन्यासियों को धमकाने वाली ऐसी सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रावण और कंस ने संन्यासियों को धमकाने का काम किया था, उसी तरह वहां भी ऐसा प्रयास किया गया, लेकिन संन्यासी विचलित नहीं हुए।
योगी ने कहा कि यह संकल्प और दृढ़ता का ही परिणाम है कि आज काशी में भव्य काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण संभव हो सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस धाम का निर्माण हुआ।
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