नयी दिल्ली , मई 12 -- एक दौर था जब रूस(पूर्व सोवियत संघ) में राज कपूर और मिथुन चक्रवर्ती ने बेइंतहा शोहरत और रूसी अवाम की मोहब्बत हासिल की थी और अब उसी पुराने लगाव के साथ भारत और रूस के आपसी ताल्लुकात एक नए दिलचस्प दौर में पहुँच गए हैं। मगर अब फर्क सिर्फ इतना है कि यह रिश्ता सिर्फ एक-दूसरे की तारीफ करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह मिलकर फिल्में बनाने और साझा कहानियों का एक बड़ा मंच बन गया है।
रूस की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी 'गाज़प्रॉम-मीडिया होल्डिंग' इस मेल-जोल के केंद्र में है। यह कंपनी भारत के फिल्मकारों के साथ मिलकर कई अहम प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। यह तालमेल सिर्फ कारोबार के लिए नहीं है, बल्कि दोनों मुल्कों के बीच फन कला की तलाश और तहजीब के लेनदेन को भी बखूबी दर्शाता है।
आने वाले प्रोजेक्ट्स में अन्ना पावलोवा और निकोलस रोरिक जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों पर आधारित फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने भारत और रूस के बीच कला और रूहानियत का पुल बनाने का काम किया था। इसके अलावा, म्यूजिकल कॉमेडी "परसिमन ऑफ माई लव" जैसी आज के दौर की फिल्मों की शूटिंग मुंबई, उदयपुर और जोधपुर में की गई है। इन फिल्मों में रूस के किस्सागोई के अंदाज को भारतीय सिनेमा की शान-ओ-शौकत के साथ जोड़ा गया है।
मशहूर फिल्म मेकर नीला माधब पांडा ने 'गाज़प्रॉम-मीडिया' के साथ चार प्रोजेक्ट्स का समझौता किया है। इनमें सबसे खास है "चेल्याबिंस्क राजा" नाम की एक काल्पनिक ड्रामा सीरीज़, जिसकी शूटिंग आजकल जयपुर की शाही लोकेशंस पर रूसी कलाकारों और क्रू के साथ चल रही है। इसी तरह "चेजिंग नॉर्डन लाइट्स" नाम का प्रोजेक्ट हिंदुस्तानी कहानियों को रूस के मरमंस्क इलाके के बर्फीले नज़ारों और उत्तरी ध्रुव तक ले जाएगा।
गाज़प्रॉम के डिप्टी सीईओ बोरिस खानचलियान ने भारत को "दुनिया की सबसे बेहतरीन क्रिएटिव इकोनॉमी" बताते हुए कहा कि दोनों मुल्कों की दोस्ती और सरकारी मदद ने इन प्रोजेक्ट्स को काफी मजबूती दी है। उनके मुताबिक, यह फिल्में न सिर्फ दोनों देशों के दर्शकों को लुभाएंगी, बल्कि इनमें पूरी दुनिया के बाजार तक पहुँचने की भी काबिलियत है।
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