नई दिल्ली , अक्टूबर 7 -- वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टेपा) के तहत उपलब्ध अवसरों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित प्रमुख निर्यातकों के सम्पर्क कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उनसे समझौते का पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करने का आह्वान किया।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि चारों ईएफटीए देश मिलकर हर वर्ष 500 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का आयात करते हैं। यह भारत के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार उपलब्ध कराता है।

श्री अग्रवाल ने निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संघों और राज्य सरकारों से आह्वान किया कि वे देश के हर हिस्से के व्यवसायों तक इस समझौते से मिलने वाले अवसरों को पहुंचाएं, ताकि वे समझ सकें कि एक मुक्त व्यापार समझौता उनके लिए क्या अवसर प्रदान करता है। उन्होंने उनसे प्रत्येक साझेदार देश और प्रत्येक बाजार के लिए अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इस योजना में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भारत प्रत्येक बाजार में किस प्रकार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएगा और किन गैर- प्रशुल्कीय मुद्दों का समाधान करना होगा।

उन्होंने कहा, "विचार यह नहीं है कि ईएफटीए देशों के व्यवसाय केवल भारत को अपने बाजार के विस्तार के रूप में देखें। विचार यह भी है कि भारत के व्यवसाय ईएफटीए देशों के बाजार को अपने बाजार के विस्तार के रूप में देखें।"इस बैठक में निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संघों और निर्यातकों के प्रतिनिधि शामिल थे। यह कार्यक्रम द्वितीय भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन 2026 का हिस्सा था और इसका आयोजन वाणिज्य विभाग द्वारा किया गया। भारत- ईएफटीए के साथ यह समझौता पिछले वर्ष पहली अक्टूबर को लागू हुआ था। श्री अग्रवाल ने कहा कि सभी चार ईएफटीए देशों-आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड-के नेता समझौते के पहले वर्ष को चिह्नित करने और आगे की दिशा तय करने के लिए नई दिल्ली में हैं।

श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत और ईएफटीए देशों ने एक-दूसरे के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं। ईएफटीए की प्रतिबद्धताओं में 92.2 प्रतिशत चीजों को शामिल किया गया है। भारत का उन्हें 99.6 प्रतिशत निर्यात इन्हीं चीजों का है। इसमें गैर-कृषि उत्पादों का पूर्ण कवरेज शामिल है। वहीं, भारत की प्रतिबद्धताओं में 82.7 प्रतिशत चीजें शामिल किया गया है, जो ईएफटीए के 95.3 प्रतिशत निर्यात के बराबर है।

उन्होंने भारतीय कंपनियों से ईएफटीए देशों की कंपनियों के साथ साझेदारी करने और उत्पादन सामग्री से लेकर अंतिम उत्पाद तक संयुक्त रूप से मूल्य श्रृंखलाएं विकसित करने का आह्वान किया, जिससे दोनों पक्षों के लिए आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़े।

श्री अग्रवाल ने कहा कि ईएफटीए देश उच्च आय वाले बाजार हैं, जहां गुणवत्ता और मूल्य को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा, "यदि आप इस बाजार में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने में सक्षम हैं, तो आप किसी भी अन्य बाजार के लिए तैयार हैं।" इन बाजारों में अर्जित गुणवत्ता को हर दूसरे बाजार में भी सराहा और महत्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में भी इन उच्च-खपत वाले बाजारों में निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं, जहां कई उत्पादों पर शुल्क घटकर शून्य हो गया है। निर्यातकों को ऐसे उत्पादों की पहचान करनी चाहिए और ईएफटीए देशों को दीर्घकालिक आपूर्ति विकसित करनी चाहिए।

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