पटना , सितंबर 11 -- टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (टीएमएच), मुंबई के मेडिकल ऑंकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कुमार प्रभाष का मानना है कि भारत में 60 से 70 प्रतिशत कैंसर के मरीज अपने खानपान तथा अनियंत्रित जीवनशैली के कारण इसकी चपेट में आ रहे हैं और इसमें सुधार कर देश में कैंसर के मरीजों की संख्या को कम किया जा सकता है।
डॉ. प्रभाष ने आज यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि कैंसर की एक बड़ी वजह अनियंत्रित खानपान के साथ शराब और तंबाकू का सेवन तथा शारीरिक निष्क्रियता है।
उन्होंने कहा कि भारत में हर साल कैंसर के नए मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के अनुमान के अनुसार, भारत में एक वर्ष में करीब 14 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं और सभी प्रकार के कैंसर के मरीजों को जोड़ दें तो प्रति एक लाख आबादी पर करीब 100 लोग कैंसर से प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि यूरोप की स्थिति भारत से अलग है। वहां प्रति एक लाख आबादी पर करीब 400 कैंसर के मरीज हैं, लेकिन भविष्य में इस बीमारी का खतरा विकासशील देशों में बढ़ने के अनुमान के मद्देनजर भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों में आज भी नए चिकित्सा उपकरण और नई दवाइयां बड़ी मात्रा में आयात की जाती हैं, जिससे इस रोग के इलाज की लागत बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाली दवा कंपनियों को प्रोत्साहन देकर देश में ही कैंसर की महत्वपूर्ण दवाइयों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
डॉ. प्रभाष ने कहा कि भारत और यूरोप की तुलना करते समय आबादी की आयु संरचना को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत की आबादी अपेक्षाकृत युवा है, जबकि यूरोप में बुजुर्ग आबादी का अनुपात अधिक है। इसलिए केवल कुल मरीजों की संख्या की तुलना करने के बजाय आयु-मानकीकृत दर को देखना अधिक वैज्ञानिक होगा। उन्होंने कहा कि भारत में कैंसर के मामलों में वृद्धि के पीछे जीवनशैली में बदलाव, बढ़ती उम्र, मोटापा, तंबाकू और शराब जैसे जोखिम कारकों के साथ-साथ बेहतर जांच और कैंसर की पहचान की सुविधाओं में सुधार की भी भूमिका है।
उन्होंने कैंसर के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुंह के कैंसर, फेफड़े के कैंसर, कोलन कैंसर और पित्ताशय के कैंसर के मामले प्रमुखता से सामने आ रहे हैं, जबकि सर्वाइकल कैंसर के मामलों में कमी आ रही है। कैंसर सामान्यतः 50 से 60 वर्ष की उम्र में अधिक देखा जाता है। उन्होंने कहा कि कैंसर केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। यह कम उम्र के लोगों और बच्चों में भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के करीब 50 प्रतिशत मामलों के कारण आज भी पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं। यही वजह है कि धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करने वाले लोग भी कैंसर से प्रभावित हो सकते हैं।
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