नयी दिल्ली , मार्च 24 -- देश में 'पैसिव यूथेनेशिया' अथवा 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु' की कानूनी अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा (32) का मंगलवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। श्री राणा पिछले 13 वर्षों से 'वेजिटेटिव स्टेट' (अचेतन अवस्था) में थे और उनके स्वास्थ्य में किसी भी तरह के सुधार के संकेत नहीं आए थे।
उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गाजियाबाद निवासी हरीश राणा के शरीर से जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति दी थी। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने माना था कि हरीश के स्वास्थ्य में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है, इसलिए उन्हें चिकित्सकीय सहायता के जरिए दी जा रही पोषण और हाइड्रेशन सेवा को बंद करने की अनुमति दी जाती है।
हरीश के पिता अशोक राणा ने भावुक होते हुए कहा, "हम पिछले तीन वर्षों से इस कानूनी लड़ाई को लड़ रहे थे। कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसी स्थिति नहीं चाहेंगे, लेकिन उनकी तकलीफ देखी नहीं जा रही थी।" उन्होंने बताया कि हरीश पंजाब यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे, लेकिन 2013 में एक इमारत से गिरने के बाद वे कभी होश में नहीं आ सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित