हैदराबाद , जुलाई 21 -- केयर अस्पताल के विशेषज्ञों ने विश्व मस्तिष्क दिवस (वर्ल्ड ब्रेन डे) के मौके पर बताया कि भारत में हर साल पक्षाघात (स्ट्रोक) के अनुमानित 12.5 लाख नए मामले सामने आते हैं। पिछले तीन दशकों में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), मधुमेह , मोटापा, तंबाकू का सेवन, तनाव, नींद की कमी, खराब जीवनशैली और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण इन मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

विशेषज्ञों ने कम उम्र के भारतीयों में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। साथ ही, कई मरीज़ शुरुआती चेतावनी के संकेतों को न पहचान पाने या न्यूरोलॉजिकल केयर की बेहतर सुविधाओं वाले अस्पतालों में भर्ती होने में देरी के कारण इलाज के लिए ज़रूरी समय गंवा देते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमानों के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल विकार दुनिया भर में विकलांगता का मुख्य कारण बन गए हैं। ये 3.4 अरब से ज़्यादा लोगों (जो दुनिया की आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक है) को प्रभावित करते हैं और हर साल 1.1 करोड़ से ज़्यादा मौतों का कारण बनते हैं।

इस वर्ष के विश्व मस्तिष्क दिवस के विषय, "मस्तिष्क स्वास्थ्य: सभी के लिए सुलभता" के उपलक्ष्य में, केयर हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन ने भारत में तंत्रिका संबंधी रोगों के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डाला और शीघ्र निदान और समय पर उपचार के महत्व पर बल दिया।

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