भुवनेश्वर , मार्च 30 -- प्रधानमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त सचिव, सुभाशीष पांडा ने स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए कहा कि एआई विशाल डेटासेट को एकीकृत करके और विशेषज्ञों को ज्यादा सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाकर भारत में अंग प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ा सकता है।

श्री पांडा ने "स्वास्थ्य सेवा में अंग प्रत्यारोपण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता" विषय पर एक प्रसार कार्यशाला-सह-क्षेत्रीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में बोल कहा कि एआई में प्रत्यारोपण प्रणाली में क्रांति लाने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि एआई आनुवंशिक, नैदानिक एवं प्रयोगशाला डेटा का उपयोग करके दाता एवं प्राप्तकर्ता के मिलान को सुव्यवस्थित कर सकता है, अंगों की उपलब्धता की रियल-टाइम निगरानी को सक्षम बना सकता है, समय पर डिलीवरी के लिए परिवहन मार्गों को अनुकूलित कर सकता है और भविष्यसूचक विश्लेषण और बुद्धिमान डैशबोर्ड के माध्यम से नैदानिक निर्णय लेने में सुधार कर सकता है।

श्री पांडा ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण में भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है, पिछले वर्ष लगभग 20,000 अंग प्रत्यारोपण किए गए। हालांकि इनमें से लगभग 82 प्रतिशत अंग जीवित दाताओं से प्राप्त होते हैं जिनमें महिलाओं का समूह सबसे बड़ा है।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त किया कि प्रत्यारोपण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निजी क्षेत्र में होता है जिससे यह किफायती नहीं होता है और उन्होंने सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और सरकारी संस्थानों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर द्वारा नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के सहयोग से किया गया जिसमें ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के 300 से अधिक डॉक्टर शामिल हुए।

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