नयी दिल्ली/लंदन , जून 06 -- उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ती आर्थिक भागीदारी में सहायता करने के लिए एक मज़बूत वैकल्पिक विवाद-निपटान (एडीआर) व्यवस्था स्थापित किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत शुक्रवार को वह लंदन में इंडियन काउंसिल ऑफ़ आर्बिट्रेशन (आईसीए) की ओर से आयोजित अंतराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय था- "आर्बिट्रेटिंग इन इंडो-ब्रिटेन कमर्शियल डिस्प्यूट्स " (अर्थात भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक विवादों में पंचनिर्णय की व्यवस्था)। इस विषय पर इस सम्मेलन का यह चौथा संस्करण बताया गया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, " हमें पंचनिर्णय की संस्थागत व्यवस्था को मज़बूत करने की ज़रूरत है, ताकि यह सुनिश्चत किया जा सके कि पक्षों की स्वयत्तता प्रक्रिया पर प्रतिवाद का स्रोत होने के बजाय प्रकिया की निषक्षता की गारंटी बनी रहे।" उन्होंने भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) काज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि इस समझौते से आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार साल दर साल बढ़ेगा। " यह समझौता बड़े आकार के कारोबार और बड़ी महत्वाकांक्षाओं का प्रतिधित्व करता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित