दरभंगा , फरवरी 21 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चन्द्र भानु प्रसाद सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत बहुभाषावाद एवं बहुसंस्कृतिवाद का देश है, जिसकी इन्द्रधनुषी संस्कृति ही उसके समग्र विकास का मूल आधार है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर हिन्दी, मैथिली, उर्दू एवं संस्कृत विभाग द्वारा जुबिली हॉल में आयोजित "अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह-2026" में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो चन्द्र भानु प्रसाद सिंह ने कहा कि मातृभाषा में वैज्ञानिक रूप से सहजता से सीखना एवं सीखाना संभव होता है। उन्होंने कहा कि सभी विकसित देश अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही विकास किया है। सभी शिक्षा नीतियों में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने का सुझाव दिया है। फिर भी आज हम अंग्रेजी की दासता स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत बहुभाषावाद एवं बहुसंस्कृतिवाद का देश है, जिसकी इन्द्रधनुषी संस्कृति ही उसके समग्र विकास का मूल आधार है।

श्री सिंह ने कहा कि आज भारत में व्यापार की भाषा हिन्दी है, लेकिन रोजगार की भाषा अंग्रेजी ही है, क्योंकि विज्ञान एवं तकनीक की शिक्षा अंग्रेजी में दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक भाषाएं उत्पादन पद्धति एवं वितरण प्रणाली से नहीं जुड़ेंगी, तब तक वह विकसित नहीं हो सकती हैं। मातृभाषा में ही हमारी संस्कृति, संस्कार, मूल्य एवं विचारधारा प्रवाहमान हो सकती हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव एवं चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालय, दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि मातृभाषा हमारे जीवन का आईना एवं हमारी पहचान है, जिनके विकास के लिये भाषण नहीं, बल्कि सरजमीन पर काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा राष्ट्रीय प्रगति की धारा में सकारात्मक भूमिका निभाती है, जिसमें पढ़ना, बोलना और समझना आसान होता है।

विशिष्ट वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार ने कहा कि मातृभाषा केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है।

प्रभारी कुलपति प्रो. अशोक कुमार मेहता ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि छात्र अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने पर अधिक सहज, आत्मविश्वासी और रचनात्मक होते हैं। मातृभाषा हमारी परंपराओं, लोककथाओं एवं साहित्य को जीवित रखने में सक्षम है। हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करें, प्रयोग बढ़ाएं और अगली पीढ़ियों तक सुरक्षित हस्तांतरित करें।

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