कोच्चि , अक्टूबर 17 -- केरल ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए ) के तहत अपनी पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। न्यूजीलैंड भेजे गए मसालों की इस खेप से राज्य के निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
यह खेप 20 अक्टूबर से लागू होने वाले इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते की तैयारियों के तहत भारत से भेजी गई शुरुआती खेपों में से एक है।
यह उपलब्धि न्यूजीलैंड के बाजार में केरल के मसाला और खाद्य उद्योग की उपस्थिति बढ़ाने और समझौते के तहत बाजार पहुंच में सुधार के फायदों को दर्शाती है। उम्मीद की जा रही है कि यह व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करेगा।
इस ऐतिहासिक प्रस्थान के अवसर पर विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशालय, कोच्चि कार्यालय ने एक समारोह आयोजित किया । इसका उद्देश्य केरल से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के उपयोग पर जोर देना था।
उल्लेखनीय है कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे और 21 सितंबर को दोनों देशों ने इसे मंजूरी दी थी। इसके लागू होने से भारतीय व्यवसायों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और वे अपने निर्यातक गंतव्यों का विविधीकरण कर सकेंगे।
सीमा शुल्क (कस्टम्स) आयुक्त टी. टीजू ने केरल के निर्यात क्षेत्र की क्षमताओं और न्यूजीलैंड में उपलब्ध अवसरों, विशेष रूप से मसालों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए संभावनाओं का उल्लेख किया। श्री टीजू ने कहा कि वर्तमान में न्यूजीलैंड के बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1.5 प्रतिशत है, जो यहाँ विस्तार की अपार संभावनाओं की ओर इशारा करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एफटीए का प्रभावी उपयोग निर्यातकों को इस क्षमता का लाभ उठाने और उनकी प्रतिस्पर्धा में सुधार करने में मदद कर सकता है।
विदेश व्यापार उप महानिदेशक (कोच्चि) हसन उसैद एन.ए. ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी से भारत के हटने के बाद की व्यापार नीति का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसायों को देश के मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों के तहत उपलब्ध लाभों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ के सहायक निदेशक राजीव ने एफटीए के प्रावधानों और लाभों के बारे में निर्यातकों के बीच अधिक जागरूकता पैदा करने के महत्व पर बल दिया।
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